इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 2 सितंबर : देश में हर साल सांप के काटने से करीब 58 हजार लोगों की जान जाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने पर इनमें से 98% लोगों की जान बचाई जा सकती है। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में ‘स्नैकमैन ऑफ हरियाणा’ सतीश फफड़ाना ने यह अहम जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि भारत में 272 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से अधिकांश जहरीले नहीं होते। “हर हजार मामलों में करीब 800 लोग गैर-जहरीले सांपों से प्रभावित होते हैं,” उन्होंने कहा। “लेकिन कोबरा जैसे सांप जानलेवा साबित हो सकते हैं, और कई बार जहरीले सांप भी काटते समय ज़हर नहीं छोड़ते—जिससे लोग झाड़-फूंक से ठीक होने का भ्रम पाल लेते हैं।”
फफड़ाना ने ज़ोर देकर कहा कि झाड़-फूंक पर भरोसा करना जानलेवा हो सकता है। “अगर सही समय पर अस्पताल पहुंचा जाए और एंटी डॉट दिया जाए, तो 98 फीसदी मामलों में जान बचाई जा सकती है।”
सरकारी पहल की जरूरत
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को युवाओं को सांप पकड़ने की ट्रेनिंग देकर कौशल निगम के तहत रोजगार देना चाहिए, ताकि इंसानों की जान भी सुरक्षित रहे और सांपों को भी मारा न जाए।
प्रो. तोमर बोले—ऐसे कार्यक्रम बेहद ज़रूरी
कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग सांप के काटने के बाद पारंपरिक झाड़-फूंक पर विश्वास करते हैं, जिससे अनजाने में कीमती जानें चली जाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देते हैं और समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित करते हैं।
सांप काट जाए तो क्या करें?
• घाव की फोटो लें ताकि प्रजाति की पहचान हो सके
• घाव को धोएं, झाड़-फूंक से बचें
• तुरंत अस्पताल जाएं
• एंटी डॉट के बाद भी निगरानी रखें
अगर सांप घर में घुस जाए तो?
• साफ-सफाई रखें
• फर्श पक्का हो, दरवाजों में गैप न हो
• मच्छरदानी लगाकर सोएं
• दरवाजों के पास आटे या सफेद सीमेंट की लाइन डालें




