हरियाणा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी (inclusive) बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में B.Ed और D.El.Ed करने वाले सभी छात्रों को विशेष जरूरतों वाले बच्चों को पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य के शिक्षक ऐसे बच्चों की पहचान कर सकें जिन्हें पढ़ाई में अतिरिक्त सहायता की जरूरत होती है और उन्हें सही तरीके से पढ़ा सकें। सरकार इसके लिए शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में विशेष कोर्स जोड़ने की तैयारी कर रही है।
राज्य के विभिन्न शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में पहले से ही सैकड़ों प्रशिक्षु शिक्षक विशेष शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र में एक मजबूत और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है, ताकि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
इस योजना के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। यहां शिक्षकों को ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, डाउन सिंड्रोम और लर्निंग डिसेबिलिटी जैसी स्थितियों की पहचान और उनके अनुसार पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
सिर्फ नए शिक्षक ही नहीं, बल्कि पहले से कार्यरत शिक्षकों को भी इस विशेष प्रशिक्षण से गुजरना होगा, ताकि वे शुरुआती स्तर पर बच्चों की समस्याओं को पहचानकर सही समय पर मदद कर सकें।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों को भी मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी। यह कदम राज्य में समावेशी शिक्षा को मजबूत करने और सभी बच्चों को समान अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




