फसल अवशेष जलाने (स्टबल बर्निंग) के मामलों में इस बार पंजाब ने हरियाणा को पीछे छोड़ दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में एक ही दिन में 341 नए मामले दर्ज किए गए, जिसके बाद कुल मामलों की संख्या हरियाणा से अधिक हो गई।
मौजूदा सीजन में पंजाब में कुल करीब 1,759 मामले सामने आए हैं, जबकि हरियाणा में यह संख्या लगभग 1,709 बताई जा रही है। खास बात यह है कि पंजाब के कुल मामलों में से 80% से ज्यादा घटनाएं सिर्फ कुछ दिनों के भीतर दर्ज हुई हैं, जिससे अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं की कटाई के बाद खेतों को जल्दी खाली करने के दबाव के कारण किसान पराली जलाने का सहारा ले रहे हैं। यही वजह है कि कुछ ही दिनों में मामलों में तेज उछाल आया है।
हालांकि, प्रशासन ने इस पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। कई जगहों पर एफआईआर दर्ज की गई हैं, जुर्माना लगाया गया है और किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
देशभर की बात करें तो इस सीजन में पराली जलाने के कुल मामलों की संख्या 49 हजार से ज्यादा हो चुकी है, जिसमें मध्य प्रदेश अब भी सबसे आगे बना हुआ है।
यह स्थिति एक बार फिर पर्यावरण और वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा रही है, खासकर उत्तर भारत के राज्यों में जहां इसका सीधा असर प्रदूषण पर पड़ता है।




