यमुनानगर। सिटी मॉल और रेलवे रोड स्थित निजी अस्पताल में हुई फायरिंग की घटना को लेकर पुलिस जांच में अहम जानकारियां सामने आई हैं। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि इस घटना को अंजाम देने के लिए दो नाबालिग युवकों को 50 हजार रुपये का लालच दिया गया था। पुलिस का कहना है कि पूरी साजिश विदेश में बैठे कुख्यात गैंगस्टर के इशारे पर रची गई, जबकि स्थानीय स्तर पर इसकी योजना और संचालन कुरुक्षेत्र निवासी मुख्य आरोपी द्वारा किया गया।
सोशल मीडिया से जोड़े गए आरोपी
जांच एजेंसियों के अनुसार मुख्य आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए ऐसे युवकों की पहचान की जो पैसों के बदले आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने को तैयार थे। इसी क्रम में उसकी पहचान करनाल क्षेत्र के दो नाबालिगों से हुई। बाद में उन्हें वारदात में शामिल होने के लिए तैयार किया गया।
पुलिस के मुताबिक पूरी योजना मुख्य आरोपी ने तैयार की थी, जबकि नाबालिगों को केवल मौके पर फायरिंग करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
डर का माहौल बनाने की कोशिश
पुलिस का मानना है कि घटना के पीछे रंगदारी वसूली का उद्देश्य था। इसी वजह से जानबूझकर भीड़भाड़ वाले स्थानों को निशाना बनाया गया। पहले निजी अस्पताल परिसर में गोलियां चलाई गईं और उसके बाद सिटी मॉल के बाहर फायरिंग कर पर्चियां फेंकी गईं, ताकि आम लोगों में भय व्याप्त हो।
मुठभेड़ में तीनों काबू
घटना के बाद पुलिस टीमों ने इलाके में नाकेबंदी कर तलाशी अभियान चलाया। रविवार सुबह गांव सुड़ैल के पास बदमाशों के साथ मुठभेड़ हुई। जवाबी कार्रवाई में दो आरोपियों को पैर में गोली लगी, जबकि तीसरा बाइक से गिरकर घायल हो गया। तीनों को हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मुठभेड़ के दौरान सीआईए की टीम के दो अधिकारियों की जान बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से बच गई।
पूरे नेटवर्क की पड़ताल जारी
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर गैंग कनेक्शन, विदेश से मिल रहे निर्देशों और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह घटना पहले की गई रंगदारी की मांग से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर और क्राइम यूनिट की संयुक्त टीमें मामले की गहनता से जांच कर रही हैं और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।




