माँ भद्रकाली शक्तिपीठ में भद्रकाली एकादशी के पावन अवसर पर बुधवार को विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच श्रद्धालुओं ने माँ के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य पुजारिन शिमला देवी द्वारा माँ भद्रकाली के जलाभिषेक एवं भव्य श्रृंगार से हुई। इस दौरान माँ को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया गया तथा विशेष स्वर्णिम कड़ा अर्पित किया गया। पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने माँ की उत्सव प्रतिमा का पंचामृत स्नान कराया। अभिषेक में शहद, दूध, दही, हल्दी, चंदन, कुमकुम और पीले चंदन का प्रयोग किया गया।
पूजन के दौरान माँ को किशमिश, विभिन्न मिष्ठान, अनार, मीठे पान और पंचामृत का विशेष भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने माँ के चरणों में चुनरी, नारियल, पुष्प एवं पुष्पहार अर्पित किए। मंदिर परिसर में लाल गुलाबों की पुष्पवर्षा और सुगंधित इत्र अर्पण से माहौल भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने भद्रकाली एकादशी के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माँ भद्रकाली ने धर्म रक्षा और राक्षसों के संहार के लिए अवतार लिया था। उन्होंने बताया कि राक्षसों के विनाश के बाद माँ का रौद्र रूप शांत करने के लिए भगवान शिव स्वयं उनके मार्ग में लेट गए थे। भगवान शिव को चरणों में देखकर माँ का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने कल्याणकारी भद्रकाली स्वरूप धारण किया। इसी स्वरूप की स्मृति में भद्रकाली एकादशी का पर्व मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि माँ भद्रकाली से सभी भक्तों के जीवन में सत्संग, श्रेष्ठ विचार और अच्छे लोगों का साथ बना रहे, यही प्रार्थना है। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष डॉ. एम.के. मौदगिल, सेवा प्रमुख देवेंद्र गर्ग, आशीष दीक्षित सहित अन्य सेवकगण उपस्थित रहे।




