चंडीगढ़। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विस्तार और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला ने बड़ा कदम उठाया है। संस्थान वर्ष 2026 से पंचकर्म टेक्नीशियन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने जा रहा है। इस संबंध में संस्थान की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
आयुष मंत्रालय भारत सरकार के मार्गदर्शन में एनआईए द्वारा आयुर्वेद शिक्षा, उपचार, अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाने की कार्य योजना तैयार की गई है। कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रो. गुलाब पमनानी के निर्देशन में ओपीडी सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जारी सूचना के अनुसार पंचकर्म टेक्नीशियन सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। कोर्स के लिए पंजीकरण शुल्क 500 रुपये रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक युवा आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सकें। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से युवाओं को पंचकर्म चिकित्सा की तकनीकी बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कोर्स पूर्ण करने के बाद प्रशिक्षित अभ्यर्थी आयुर्वेदिक अस्पतालों, पंचकर्म केंद्रों और वेलनेस संस्थानों में सेवाएं दे सकेंगे। इससे न केवल उपचार की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए यह कोर्स उपयोगी सिद्ध होने की उम्मीद है।
पंचकर्म विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अनुराग कुशल ने बताया कि संस्थान में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ पंचकर्म उपचार की सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। पंचकर्म कक्ष में वमन, विरेचन, बस्ती, शिरोधारा और अभ्यंग जैसी थैरपी उपलब्ध हैं। भर्ती रोगियों को प्रतिदिन पंचकर्म थैरपी और फिजियोथेरेपी की सुविधा दी जा रही है।
इसके साथ ही एनआईए पंचकूला में ईसीजी, लैब जांच, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं, जिनका बड़ी संख्या में रोगी लाभ उठा रहे हैं। पंचकर्म टेक्नीशियन कोर्स में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।




