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अमृत का भंडार है गीता, संस्कृति का श्रृंगार है गीता : स्वामी ज्ञानानंद

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जीओ गीता द्वारा पांच दिवसीय गीता चिंतन शिविर का शुभारंभ

कुरुक्षेत्र, 04 जनवरी।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता अमृत का भंडार है, जिसमें समस्त ग्रंथों का सार समाहित है। गीता भारतीय संस्कृति का श्रृंगार है, जो मानव जीवन से अज्ञान और मानसिक प्रदूषण को दूर करती है। वे जीओ गीता संस्था द्वारा गीता ज्ञान संस्थानम् में आयोजित पांच दिवसीय गीता चिंतन शिविर के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

इससे पूर्व स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर शिविर का विधिवत शुभारंभ किया। शिविर में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए 200 से अधिक प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं।

गीता प्रेम और समरसता का संदेश देती है

अपने प्रवचन में स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि गीता प्रेम का पाठ पढ़ाकर भेदभाव को समाप्त करती है और पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण की अनेक दिव्य विभूतियों का वर्णन है, जो मानव को जीवन का सही मार्ग दिखाती हैं।

अर्जुन के माध्यम से विश्व को मिला गीता उपदेश

उन्होंने कहा कि महाभारत के युद्ध के दौरान जब अर्जुन मोहग्रस्त हो गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें निमित्त बनाकर संपूर्ण मानवता के लिए गीता का उपदेश दिया। गीता का संदेश हर युग और हर व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के प्रश्नों के माध्यम से प्रत्येक मानव की शंकाओं का समाधान किया।

कपट से नहीं, प्रेम से मिलता है गीता ज्ञान

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान और गुरु के दरबार में कपट का कोई स्थान नहीं होता। अर्जुन में सीखने की जिज्ञासा, निस्वार्थ प्रेम और श्रद्धा थी, इसलिए वह गीता उपदेश का पात्र बने। दुर्योधन में यह भाव न होने के कारण वह इस दिव्य ज्ञान से वंचित रहा। गीता अज्ञान को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है और जन्म-जन्मांतर के अंधकार को मिटाती है।


बॉक्स : धूमधाम से मनाया गया खिचड़ी उत्सव

गीता ज्ञान संस्थानम् परिसर स्थित श्रीकृपा बिहारी जी मंदिर में खिचड़ी उत्सव स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंगला आरती एवं हवन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

गीता उत्सव के दौरान सूरदास, चतुर्भुज दास, सीता-राम की केवट लीला, लव-कुश तथा राधा-कृष्ण की दिव्य झांकियों का मनोहारी प्रस्तुतीकरण किया गया। स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि ये झांकियां भक्ति, सेवा, त्याग और प्रेम के भाव को जागृत करती हैं। उन्होंने बताया कि यह उत्सव वृंदावन के श्रीराधा वल्लभ मंदिर की परंपरा के अनुरूप आयोजित किया गया है।

वृंदावन से पधारे रसिक संतों और कलाकारों द्वारा मधुर पद गायन एवं रसपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिस पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। संपूर्ण वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो गया।

जीओ गीता के प्रधान एवं जनता कॉलेज कोल के प्राचार्य डॉ. ऋषिपाल ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे खिचड़ी उत्सव के दूसरे दिन 5 जनवरी को प्रातः साढ़े छह बजे अधिक संख्या में पहुंचें। उन्होंने कहा कि दूसरे दिन भी इसी प्रकार का भव्य और भक्तिमय आयोजन किया जाएगा।

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