कुरुक्षेत्र, 3 जनवरी।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि सांसारिक कमाई और भौतिक साधन व्यक्ति को सुविधाएं तो प्रदान कर सकते हैं, लेकिन मानसिक शांति नहीं दे सकते। सच्ची मानसिक शांति के लिए अध्यात्म के मार्ग पर चलना आवश्यक है।
स्वामी ज्ञानानंद जी गीता ज्ञान संस्थानम् स्थित श्री कृपा बिहारी मंदिर परिसर में दीक्षित एवं समर्पित परिवारों की ओर से नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत गीता पाठ से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
ईर्ष्या और कड़वाहट छोड़ नए वर्ष में प्रवेश का संदेश
अपने आशीर्वचन में गीता मनीषी ने कहा कि नववर्ष में ईर्ष्या, द्वेष और कड़वाहट को त्यागकर प्रभु नाम के स्मरण, विश्वास और सद्भावना के साथ जीवन की शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सनातन परंपराओं से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सनातन संस्कारों से जुड़ाव पर दिया जोर
स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि हमें कॉन्वेंट संस्कृति के अंधानुकरण से बचते हुए भावी पीढ़ी को भारतीय सनातन सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना होगा। प्रत्येक व्यक्ति को नववर्ष में गीता पाठ और नाम सिमरण का संकल्प लेना चाहिए।

अध्यात्म से ही मिलती है मानसिक शांति
उन्होंने कहा कि संसार के साधन और विज्ञान भी मानसिक शांति देने में असमर्थ हैं। केवल अध्यात्म और भगवान की शरण में जाने से ही मानसिक शांति संभव है। भगवान की शरण में जाने से न केवल इस लोक में शांति मिलती है, बल्कि परलोक में मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।
मधुर वाणी और अच्छे व्यवहार का महत्व
गीता मनीषी ने कहा कि वाणी का प्रयोग प्रेम, आदर और सद्भाव बढ़ाने के लिए होना चाहिए। कटु वचन कड़वाहट को जन्म देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में अच्छे व्यवहार और आचरण पर विशेष बल दिया है।
4 व 5 जनवरी को मनाया जाएगा खिचड़ी उत्सव
स्वामी ज्ञानानंद जी ने बताया कि श्री कृपा बिहारी मंदिर में वृंदावन के राधा बल्लभ मंदिर की तर्ज पर 4 और 5 जनवरी को खिचड़ी उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह उत्सव प्रातः साढ़े छह से साढ़े सात बजे तक आयोजित होगा।
7 जनवरी तक चलेगा पांच दिवसीय गीता चिंतन शिविर
उन्होंने जानकारी दी कि जीओ गीता द्वारा गीता चिंतन शिविर का शुभारंभ किया गया है, जो 7 जनवरी तक चलेगा। इस पांच दिवसीय शिविर में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से दो सौ से अधिक विद्वान भाग ले रहे हैं। शिविर में गीता के विभिन्न पक्षों पर गहन चिंतन किया जाएगा।




