न्यायिक, साहित्यिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर
कुरुक्षेत्र, 6 दिसंबर। हरियाणा न्यायिक सेवा में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. कविता कंबोज के पिता, तथा प्रख्यात लेखक, शिक्षाविद् और समाजसेवी मोहिंदर सिंह कंबोज का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया है।
इंद्री (करनाल) निवासी मोहिंदर सिंह कंबोज ने शिक्षा, वित्तीय साक्षरता और जनहित के कार्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में तीन दशक से अधिक सेवाएं देते हुए वे करनाल जोन के पहले करोड़पति विकास अधिकारी रहे। बीमा और वित्तीय विषयों पर उनकी 15 पुस्तकों सहित कुल 30 पुस्तकों को पाठकों ने व्यापक रूप से सराहा।
शिक्षा क्षेत्र में भी कंबोज के प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे। उन्होंने इंद्री में सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना करवाई और वर्ष 1995 में देश के शुरुआती ‘नो बैग स्कूल’ मॉडल की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य बच्चों को तनाव-मुक्त और रचनात्मक शिक्षा प्रदान करना था। वे भारत के पहले आईआरडीए-अनुमोदित वित्तीय प्रशिक्षण संस्थान एनआईआईएम के संस्थापक रहे, जिसके माध्यम से उन्होंने सैकड़ों युवाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने में मदद की।
मोहिंदर कंबोज ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा और सामाजिक मूल्यों का मार्ग दिखाया। उनकी पुत्री डॉ. कविता कंबोज, लॉ में डॉक्टरेट उपाधि धारक हैं और फिलहाल दादरी (हरियाणा) में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।
साहित्यिक, न्यायिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि समाज व शिक्षा के प्रति उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उनके परिवार में पत्नी, पुत्र, पुत्री और अन्य परिजन हैं।




