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ज्योतिसर में विश्व मंगल महायज्ञ की पूर्णाहुति, मुख्यमंत्री सैनी बोले– गीता जीवन की हर चुनौती का समाधान

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स्वामी ज्ञानानंद ने कहा– मातृभूमि सेवा मिशन गीता प्रसार का वैश्विक अभियान, डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र बोले– गीता मानवता का सर्वोपरि संविधान

कुरुक्षेत्र, 1 दिसंबर 2025।
अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद्गीता जयंती समारोह–2025 के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय विश्व मंगल महायज्ञ की पूर्णाहुति रविवार को गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि पूर्णाहुति का नेतृत्व गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज और मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने संयुक्त रूप से किया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि “गीता एक वैश्विक ग्रंथ है, जो जीवन की कठिनाइयों और सुविधाओं दोनों का सामना करने के लिए सही मार्ग दिखाती है।” उन्होंने मातृभूमि सेवा मिशन के सामाजिक व धार्मिक कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि गीता के सिद्धांत व्यक्तिगत व सामाजिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि मातृभूमि सेवा मिशन श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसार का एक सामाजिक एवं आध्यात्मिक अभियान है। उन्होंने कहा कि विश्व मंगल महायज्ञ, विश्व शांति और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को सशक्त बनाने का एक सार्थक प्रयास है।

मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि “गीता मानवता का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण संविधान है। गीता का धर्म ही वैदिक धर्म है, जिसमें समस्त प्राणियों के कल्याण का संदेश निहित है।” उन्होंने घोषणा की कि अगली गीता जयंती–2027 तक प्रतिदिन गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में नित्य प्रातः गीता ज्ञान यज्ञ आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतिदिन गीता के एक अध्याय की आहुति दी जाएगी।

पूर्णाहुति यज्ञ का संचालन आचार्य नरेश कौशिक ने वैदिक ब्रह्मचारियों के साथ किया। ब्रह्मचारियों ने सामूहिक रूप से गीता श्लोकों का सस्वर उच्चारण कर यज्ञ में आहुति समर्पित की। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा ज्योतिसर से गीता का वैश्विक पाठ किया गया।

कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने ज्योतिसर तीर्थ की नित्य स्वच्छता करने वाले कर्मचारियों को स्वच्छता प्रहरी सम्मान प्रदान करते हुए स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और कंबल भेंट किए। साथ ही मुख्यमंत्री, स्वामी ज्ञानानंद व अन्य विशिष्ट अतिथियों को भी अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में देश–विदेश से आए गीता विद्वानों, साधु–संतों, गीता भक्तों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सहभागिता की। आयोजन का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।

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