यमुनानगर, 27 नवंबर। यमुनानगर खनन जोन में अवैध खनन व ओवरलोडेड परिवहन पर रोक के लिए प्रशासन की सख्ती के बावजूद खनन माफिया नित नए हथकंडे अपनाने लगे हैं। मिली जानकारी के अनुसार अब हिमाचल प्रदेश के करोड़ों रुपये के फर्जी बिलों की आड़ लेकर खनन सामग्री का अवैध परिवहन किया जा रहा है, जिससे हरियाणा सरकार को प्रतिदिन करोड़ों की राजस्व हानि हो रही है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनन विभाग का एक बड़ा अधिकारी और उसके दो जूनियर अफसर इस अवैध गतिविधि में मिलीभगत कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले ही अवैध खनन को बढ़ावा दें, तो उनकी शिकायतें भी प्रभावी नहीं हो पातीं।
ग्रामीणों का दावा—1200 तक ओवरलोडेड डंपरों का प्रतिदिन अवैध परिवहन
अरशद नूर मोहम्मद, तैयब हुसैन, जोगिंदर सिंह, विनोद देशराज और मोहम्मद आशिक सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि खनन माफिया की सांठगांठ के कारण प्रतिदिन लगभग 1200 ओवरलोडेड डंपरों के माध्यम से अवैध खनन सामग्री का परिवहन किया जा रहा है। इनसे होने वाली बड़ी कमाई कथित तौर पर संबंधित खनन अधिकारियों एवं उनके सहयोगियों की जेब में जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार ये अधिकारी स्क्रीनिंग प्लांट, स्टोन क्रशर संचालकों और ट्रांसपोर्टरों से “सेटिंग” कर अवैध खनन को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यदि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जांच करें, तो खनन विभाग और खनन माफिया की मिलीभगत सामने आ जाएगी और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
प्रशासन ने सक्रिय किए बंद चेकिंग पॉइंट्स
जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने हाल ही में बंद पड़े चेकिंग पॉइंट्स को दोबारा सक्रिय कर ओवरलोडिंग व अवैध परिवहन पर नकेल कसने की पहल की है। इससे हताश माफिया और उनके संरक्षक अधिकारी अब फर्जी बिलों का सहारा लेकर बच निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
शिकायत पर केवल खाना-पूर्ति का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे खनन विभाग में अवैध खनन की शिकायत करते हैं, तो अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते हुए 1000–1200 टन की एफआईआर दर्ज कर मामला दबा देते हैं और उच्च अधिकारियों को गलत जानकारी भेजकर अवैध खनन को बढ़ावा देते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए, तो खनन विभाग से जुड़े भ्रष्ट अधिकारी उजागर होंगे और अवैध खनन एवं ओवरलोडिंग पर निर्णायक अंकुश लगेगा।




