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श्रीमद्भागवत गीता का मूल चिंतन निष्काम कर्म एवं सेवा है: डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

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कुरुक्षेत्र, 18 नवम्बर 2025। अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भागवत गीता जयंती समारोह-2025 के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा संचालित अठारह दिवसीय कार्यक्रम के चौथे दिन ‘श्रीमद्भागवत गीता में निष्काम कर्म’ विषय पर गीता सेवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गीता श्लोकों के उच्चारण, भारत माता और भगवान श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।

कार्यक्रम में मानव सेवा संस्थान, रायबरेली (उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल को समाज सेवा में विशेष योगदान के लिए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र द्वारा सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि मनुष्य का जीवन निरंतर कर्म से बंधा है। सुबह से लेकर रात तक हम अनेक क्रियाएँ करते हैं, और फल की इच्छा के कारण दुःख व निराशा का अनुभव करते हैं। ऐसे में गीता का निष्काम कर्म सिद्धांत जीवन को संतुलित और शांतिपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा कि निष्काम सेवा का अर्थ है बिना स्वार्थ और फल की इच्छा के भगवान, समाज या मानवता की सेवा करना, जो व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाती है।

कार्यक्रम में पंच कैलाशी रामप्रकाश श्रीवास्तव, राकेश जैन और नवीन चंद ने भी अपने विचार रखे। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। सभी अतिथियों को मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट किए गए। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।

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