नई दिल्ली। पीडीपी चीफ और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि 10 नवंबर को लाल किले के पास हुआ ब्लास्ट देशभर में बढ़ती असुरक्षा की भावना और जम्मू-कश्मीर में केंद्र की नीतियों की नाकामी को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दुनिया को दिखाने की कोशिश की कि कश्मीर में सब कुछ सामान्य है, लेकिन “कश्मीर की परेशानियां लाल किले के सामने गूंज रही हैं।”
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सरकार ने जम्मू-कश्मीर को सुरक्षित बनाने का वादा किया था, लेकिन उसकी नीतियों ने दिल्ली को भी असुरक्षित कर दिया है।
10 नवंबर की शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार ब्लास्ट हुआ था, जिसमें पुलवामा निवासी डॉ. उमर ने खुद को विस्फोटक के साथ उड़ा लिया था। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए। इस व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और यूपी पुलिस के साथ NIA, NSG और ED कर रहे हैं। अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े 6 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
महबूबा मुफ्ती के बयान की प्रमुख बातें—
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हिंदू-मुस्लिम राजनीति से वोट तो मिल सकते हैं, लेकिन देश किस दिशा में जा रहा है, इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
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जितना विभाजन होगा, उतना खून-खराबा बढ़ेगा और इसे वोट बैंक समझने वालों को दोबारा सोचना चाहिए। देश कुर्सी से बड़ा है।
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ऐसे हमलों में शामिल युवाओं को चेतावनी दी कि यह कदम न सिर्फ उनके लिए बल्कि परिवार, जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के लिए खतरनाक है। निर्दोष लोगों की जिंदगी दांव पर लग जाती है।




