आयुष विश्वविद्यालय में 2 दिसंबर को राष्ट्रीय संगोष्ठी — स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए गीता का समग्र दृष्टिकोण मुख्य विषय
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा 2 दिसंबर को “भगवद्गीता का पराडाइम: स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए समग्र दृष्टिकोण” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का सानिध्य प्राप्त होगा।
संगोष्ठी में डीएमआईएचईआर (नागपुर) के प्रो-चांसलर प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश मिश्रा और सर गंगा राम अस्पताल, नई दिल्ली के वरिष्ठ सर्जन प्रो. (डॉ.) बी.बी. अग्रवाल बतौर रिसोर्स पर्सन शामिल होंगे। कार्यक्रम में देशभर के आयुर्वेदिक संस्थानों से 500 से अधिक प्रतिभागियों के आने की संभावना है।
भगवद्गीता: आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान का आधार
तैयारियों की समीक्षा के लिए कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने शनिवार को बैठक आयोजित की। उन्होंने कहा कि आज तनावपूर्ण जीवनशैली में भगवद्गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक वैज्ञानिक मार्गदर्शिका है।
संगोष्ठी में गीता के “कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग और ध्यान योग” अध्यायों को आयुर्वेदिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से जोड़कर समझाया जाएगा।
15 समितियों का गठन, विस्तृत तैयारियां पूरी
आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि संगोष्ठी के सुचारू संचालन के लिए 15 समितियों का गठन किया गया है और सभी को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
बैठक में प्रो. दीप्ति पराशर, प्रो. सीमा रानी, प्रो. कृष्ण कुमार, प्रो. रविंद्र अरोड़ा, प्रो. नीलम, प्रो. शीतल सिंगला, प्रो. राजेंद्र सिंह, प्रो. शुभा कौशल, प्रो. विदुषी त्यागी, प्रो. रणधीर सिंह सहित कई डॉक्टर और संकाय सदस्य उपस्थित रहे।




