इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 3 अक्टूबर : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2026 से दर्ज होने वाली हर एफआईआर का निपटारा तीन साल के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से देश को आज़ादी तो मिली, लेकिन अंग्रेजी कानूनों से नहीं। अब 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता के तहत न्याय की प्रक्रिया तेज़, वैज्ञानिक और नागरिक-केंद्रित हो गई है।
प्रदर्शनी में दिखा बदलाव का असर
• कुरुक्षेत्र के केडीबी मेला ग्राउंड में तीन नए कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
• शाह ने बताया कि हत्या के एक मामले में 112 दिन में सजा सुनाकर अपराधी को जेल भेजा गया।
• अब एक तिहाई सजा पूरी होने पर जेल खुद सजा माफ करवाने की अर्जी लगाएगी।
न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी सुधार
• पहले केवल 40% मामलों में न्याय मिलता था, अब यह दर 80% तक पहुंची है।
• पुलिस अब डंडे की जगह डेटा जुटा रही है, थर्ड डिग्री की जगह वैज्ञानिक जांच पर ज़ोर है।
• पुलिस, अभियोजन, न्यायपालिका, जेल और फोरेंसिक को ऑनलाइन जोड़ा गया है।
महिलाओं-बच्चों के लिए विशेष प्रावधान
• सात साल से अधिक सजा वाले मामलों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य।
• सभी बिंदुओं की वीडियोग्राफी सुनिश्चित।
• ट्रायल इन एबसेंसिया का प्रावधान — देश छोड़कर भागे अपराधियों पर अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलेगा।
स्वदेशी को बढ़ावा, GST दरों में कटौती
• 365 वस्तुओं पर GST दरें घटाई गईं।
• शाह ने नागरिकों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की।
• 2047 तक भारत को विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य।

कुरुक्षेत्र से धर्म और सत्य का संदेश
• शाह ने कहा, “कुरुक्षेत्र की भूमि ने सिद्ध किया कि विजय हमेशा धर्म और सत्य की होती है।”
• हरियाणा की मातृशक्ति सेना और CAPF में सबसे अधिक योगदान दे रही है।




