इंसाइट न्यूज 24: हरियाणा में हाल के वर्षों में संगठित अपराध (Organised Crime) को लेकर चिंता लगातार गहराती जा रही है। अपराधियों के सक्रिय गैंग न केवल राज्य की क़ानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
राजनीतिक हलकों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा में 80 से अधिक सक्रिय गिरोह काम कर रहे हैं। इनमें सुपारी किलिंग, वसूली, अवैध शराब, ड्रग्स और ज़मीन कब्ज़े जैसे अपराध शामिल हैं। कई बड़े गैंग आपसी वर्चस्व की लड़ाई में खुलेआम गोलीबारी जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, जिससे आम जनता दहशत में है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाल ही में कहा कि हरियाणा आज “देश का शीर्ष अपराध केंद्र” बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नाकामी और पुलिस पर राजनीतिक दबाव के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
वहीं, पुलिस विभाग का कहना है कि उन्होंने अपराध पर नकेल कसने के लिए विशेष टास्क फोर्स और संगठित अपराध नियंत्रण इकाइयाँ बनाई हैं। आधुनिक तकनीक, निगरानी कैमरे और डिजिटल इंटेलिजेंस के ज़रिए अपराधियों को पकड़ने की कोशिशें तेज़ की जा रही हैं।
लेकिन ज़मीनी हालात बताते हैं कि गिरोहबाज़ी और संगठित अपराध सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण इलाक़ों में भी फैल चुके हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ अब इसे कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए भी बड़ा ख़तरा मान रहे हैं।




