फरीदाबाद।
हरियाणा पुलिस ने एक बड़े आतंक मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है जिसमें डॉक्टरों की भूमिका सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने फरीदाबाद के एक फ्लैट से करीब 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, एक AK-47 राइफल, राइफल कारतूस, और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। यह बरामदगी हरियाणा-दिल्ली सीमा के नजदीक हुई है, जिससे राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दो संदिग्धों में एक महिला डॉक्टर और उसका सहयोगी शामिल हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों एक विदेशी नेटवर्क से संपर्क में थे और संदिग्ध रूप से आतंक से जुड़े लेन-देन कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि ये लोग कथित तौर पर विस्फोटक तैयार करने और उसकी आपूर्ति की साजिश में शामिल थे।
फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर ने बताया कि यह कार्रवाई खुफिया विभाग से मिली जानकारी के आधार पर की गई। तलाशी के दौरान कुछ डिजिटल साक्ष्य और गुप्त दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिन्हें साइबर टीम द्वारा जांचा जा रहा है। फिलहाल, एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, संदिग्ध डॉक्टर और उसका साथी कुछ महीनों से इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे। दोनों का व्यवहार सामान्य था, जिससे किसी को संदेह नहीं हुआ।
विशेषज्ञों की राय
सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि “शिक्षित वर्ग में आतंक की पैठ” भारत के लिए नई चुनौती बन सकती है। डॉक्टर, इंजीनियर या प्रोफेशनल वर्ग के लोग यदि किसी भी प्रकार के चरमपंथी नेटवर्क में जुड़ते हैं, तो यह सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
सरकार का रुख
गृह मंत्रालय ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी तेज कर दी गई है।
निष्कर्ष:
यह मामला केवल एक आतंकी साजिश नहीं, बल्कि समाज में छिपे उस खतरे की चेतावनी भी है जो शिक्षित वर्ग में पनप सकता है। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे गहन पूछताछ जारी है।



