हरियाणा प्रशासन में अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) स्तर पर बड़ी कमी देखने को मिल रही है। प्रदेश के 22 जिलों में से 6 जिले—अंबाला, चरखी दादरी, कैथल, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़ (नारनौल) और नूंह—बिना एडीसी के चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकार के पास आईएएस अधिकारियों की पर्याप्त उपलब्धता होने के बावजूद इन जिलों में अब तक नियुक्ति नहीं की गई है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज का अंबाला जिला भी पिछले तीन महीनों से एडीसी विहीन है।
फिलहाल भिवानी के एडीसी दीपक बाबूलाल करवा को चरखी दादरी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार एडीसी पद पर सिर्फ आईएएस ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ HCS अधिकारी भी तैनात किए जा सकते हैं। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा के सभी 22 जिलों में एडीसी का स्थायी पद स्वीकृत है, जो डीसी के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रशासनिक पद होता है।
कुछ जिलों में सीनियर HCS को मिल सकता है चार्ज
हेमंत कुमार के मुताबिक 2020 में जारी एचसीएस कैडर आदेश में 22 में से 15 जिलों के एडीसी पदों को HCS कैडर के लिए निर्धारित किया गया था। वर्तमान में 2016 बैच तक के HCS अधिकारियों को एडीसी बनाया जा सकता है। हालांकि अभी केवल चार जिलों—गुरुग्राम, झज्जर, फतेहाबाद और यमुनानगर—में वरिष्ठ HCS अधिकारी बतौर एडीसी तैनात हैं।
ADC की नियुक्ति क्यों है जरूरी?
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DC के कार्यों में सहायक: एडीसी डीसी के दैनिक प्रशासनिक कार्यों का भार कम करते हैं।
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शिकायतों का निवारण: आय प्रमाण पत्र, सर्वे विवाद और अन्य जनसमस्याओं का त्वरित निपटारा करते हैं।
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प्रशासनिक विभाजन: भूमि रिकॉर्ड, राजस्व और नागरिक सेवाओं से जुड़े कई कार्य एडीसी देखते हैं।
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प्रशासनिक निरंतरता: डीसी की अनुपस्थिति में एडीसी ही निर्णय लेने और कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालते हैं।
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विशेष शक्तियाँ: एडीसी को डीसी जैसी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य गति से चलते हैं।
फिलहाल राज्य सरकार पर इन रिक्त पदों को भरने का दबाव बढ़ता जा रहा है ताकि जिला प्रशासन की दक्षता बरकरार रह सके।




