अटल जी की 101वीं जयंती पर कुरुक्षेत्र में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, काव्य से व्यक्त हुआ राष्ट्रप्रेम
कुरुक्षेत्र, 23 दिसंबर।
भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में अदबी संगम कुरुक्षेत्र, सुर संगम कला मंच और गुलजारी लाल नंदा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों, साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार ने की। अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि स्व. अटल बिहारी वाजपेयी न केवल भारतीय राजनीति के महान स्तंभ थे, बल्कि साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय है। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदनाएं, सामाजिक सरोकार और जीवन मूल्यों का सशक्त समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन युवा पीढ़ी को अटल जी के विचारों और आदर्शों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
केंद्र की निदेशिका एवं कार्यक्रम संयोजिका प्रो. शुचिस्मिता ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया, जबकि डॉ. सुभाष गर्ग ने आयोजन की साहित्यिक और सामाजिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
कवि सम्मेलन में श्रीमती मीरा गौतम, श्री पी. एन. गौतम, श्रीमती सुमन जैन, श्री सूबे सिंह ‘सुजान’, श्रीमती गायत्री कौशल, डॉ. ममता सूद, कविता रोहिला, डॉ. मंजीत सिंह, चंद्रशेखर, विशाल शर्मा, योगेश ‘योगी’, राममूर्ति शर्मा, संजीव छाबड़ा, डॉ. अनीता रामपाल, ज्योतिरमा नारंग, यासीन, अमित शर्मा और आर. के. सुखीजा सहित अनेक कवियों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण डॉ. मंजीत सिंह की उर्दू भाषा पर आधारित पुस्तक “रमज़ा-ए-उर्दू” का विमोचन रहा। अटल जी के काव्य, विचारधारा, राष्ट्रवाद और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित रचनाओं के पाठ से सभागार साहित्यिक ऊर्जा और भावनात्मक गरिमा से भर उठा। मंच संचालन डॉ. गायत्री कौशल ने किया।




