कुरुक्षेत्र, 29 सितम्बर : शारदीय नवरात्र की महासप्तमी पर माँ भद्रकाली मंदिर में श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माहौल में माँ कालरात्रि की पूजा और मनोकामना पूर्ति हवन का आयोजन हुआ।
पूजन की शुरुआत पीठाध्यक्ष पं. सतपाल शर्मा द्वारा माँ कालरात्रि की महिमा के वर्णन से हुई। उन्होंने बताया कि माँ कालरात्रि सहस्रार चक्र को नियंत्रित करती हैं और भक्तों के कल्याण हेतु शुभंकरी कहलाती हैं।
मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने गुड़ और लौंग से माँ को भोग अर्पित किया और 108 बार “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै” मंत्र का जाप किया। नवपत्रिका पूजा में तुलसी, आम, पीपल, अनार, बरगद सहित नौ पवित्र पौधों से माँ का आह्वान किया गया।
प्रातः 10 बजे मनोकामना पूर्ति हवन यज्ञ में मुख्य यजमान एस. के. गोयल (कैथल) सपरिवार शामिल हुए। आम की लकड़ी से अग्नि प्रज्ज्वलित कर धूप, नारियल, मखाना, बेलपत्र, घी, शहद आदि की आहुति दी गई। “भद्रकाली महाकाली किल-किल फट स्वाहा” मंत्र की 21 बार आहुति के साथ वातावरण दिव्यता से भर गया।
पीठाध्यक्ष ने हवन को आध्यात्मिक ही नहीं, चिकित्सीय और पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी बताया। पूर्णाहुति शिमला देवी द्वारा दी गई।
दोपहर में व्रत भंडारे में दिनेश गोयल, धैर्य शर्मा और राजेंद्र कुमार ने यजमान के रूप में भाग लिया। भजन संध्या में पवन शर्मा एंड पार्टी ने माँ का गुणगान किया, जिसमें मिलाप गुप्ता मुख्य अतिथि रहे। महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
पीठाध्यक्ष ने सभी भक्तों से दुर्गाष्टमी की रात्रि जागरण में भाग लेने और माँ की महाआरती में शामिल होने का आग्रह किया।




