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किशनगढ़ की अनोखी शिल्पकला: एक ही पत्थर से तराशा गया अद्भुत लैंप बना आकर्षण का केंद्र

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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में राजस्थान के चित्रा व रंजन जैन ने प्रस्तुत की मीनाकारी से सजी पारंपरिक कला; 16 वर्षों से लगातार जोड़ रहे पर्यटकों को राजस्थानी शिल्प से

कुरुक्षेत्र, 19 नवंबर।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में इस बार राजस्थान के किशनगढ़ की अनोखी शिल्पकला लोगों के लिए मुख्य आकर्षण बनी हुई है। शिल्पकार चित्रा जैन और रंजन जैन द्वारा एक ही पत्थर को तराशकर तैयार किया गया अद्वितीय लैंप महोत्सव में आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। यह विशेष लैंप किशनगढ़ की प्रसिद्ध मीनाकारी शैली में तैयार किया गया है, जो न केवल भारत की प्राचीन कला की झलक दिखाता है बल्कि आधुनिक दौर में लुप्त हो रही पारंपरिक शिल्पकला को भी सहेज रहा है।

शिल्पकार इस कला को महोत्सव के उत्तर दिशा में स्थित स्टॉल नंबर 74 पर प्रदर्शित कर रहे हैं। दोनों शिल्पकारों ने बताया कि राजस्थान किशनगढ़ की यह कला विश्व स्तर पर विख्यात है, जिसमें मेटल, वुड और पत्थरों पर सूक्ष्म नक्काशी और मीनाकारी कर राजस्थानी कला को उकेरा जाता है।
उनके अनुसार, बनाया गया यह विशेष लैंप एक ही पत्थर से तराशकर तैयार किया गया है, जिसकी कीमत लगभग 2200 रुपये रखी गई है। यह लैंप रात के समय प्रकाश देने के साथ-साथ कला संरक्षण का भी अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

चित्रा और रंजन जैन पिछले 16 वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पर्यटकों की बढ़ती मांग को देखते हुए इस वर्ष लैंप के अलावा पत्थर से तराशकर तैयार किए गए फ्लावर पॉट, झूमर, तोरण और अन्य सजावटी वस्तुएं भी लेकर आए हैं, जिनकी कीमत 150 रुपये से 5000 रुपये तक है।

शिल्पकारों ने कहा कि एनजेडसीसी (North Zone Cultural Centre) और प्रशासन द्वारा दिया गया यह मंच पारंपरिक शिल्पकला को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण काम कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव ने शिल्पकारों को अपनी कला को देश-विदेश तक पहुंचाने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है।

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