इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 10 अक्टूबर : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप में शालाक्य तंत्र (नेत्र, कर्ण, नासा, मुख) विषय का नया स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम तैयार किया गया। यह पाठ्यक्रम पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के बीच एक सेतु का कार्य करेगा।
कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) के तत्वावधान में हुआ, जिसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान को सौंपी गई थी। उनके नेतृत्व में देशभर के आयुर्वेद विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने मिलकर पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार किया।
सिलेबस कमेटी की चेयरपर्सन प्रो. वैद्य संगीता सालवी (तिलक आयुर्वेदिक कॉलेज, पुणे) के नेतृत्व में तीन दिनों तक चली गहन चर्चा के बाद पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया। वर्कशॉप में NCISM के अध्यक्ष डॉ. एस.एम. कुंदरी, पूर्व अध्यक्ष डॉ. बी.एस. प्रसाद, और देशभर के प्रतिष्ठित आयुर्वेद संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
समय की मांग के अनुरूप बदलाव
पूर्व अध्यक्ष डॉ. बी.एस. प्रसाद ने बताया कि नया सिलेबस वर्तमान चिकित्सा शिक्षा प्रणाली की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को समग्र और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।
कुलपति प्रो. धीमान बोले— यह एक ऐतिहासिक कदम
कुलपति प्रो. धीमान ने कहा, “यह पाठ्यक्रम आयुर्वेदिक उच्च शिक्षा में एक ऐतिहासिक पहल है। इससे विद्यार्थियों को शालाक्य तंत्र की गहराई और उपयोगिता का समग्र ज्ञान मिलेगा, जो पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली को जोड़ने का कार्य करेगा।”
उन्होंने सभी विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को इस अकादमिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनना गर्व की बात है।




