इंसाइट न्यूज 24 : चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को लेकर सख़्त और स्पष्ट संदेश दिया।
सम्मेलन के दौरान मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत किसी भी दबाव में नहीं आएगा और अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता पर कायम रहेगा। उन्होंने वैश्विक मंच पर यह दोहराया कि भारत का मकसद न सिर्फ़ अपनी सीमाओं की सुरक्षा करना है, बल्कि विश्व शांति और स्थिरता में भी सक्रिय योगदान देना है।
सूत्रों के मुताबिक, मोदी की मुलाकात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी हुई। इस दौरान ऊर्जा सहयोग, सुरक्षा चुनौतियाँ और एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। मोदी ने साफ किया कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा और इसके खिलाफ़ कठोर कदम उठाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत है।
भारत की यह भागीदारी यह दिखाती है कि वह अमेरिका, रूस और चीन—सभी के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। यही भारत की “वसुधैव कुटुंबकम्” की सोच को मज़बूत करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि SCO मंच पर मोदी का यह रुख भारत को न सिर्फ़ एशिया में बल्कि पूरी दुनिया में एक स्वतंत्र और निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करता है।




