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CME में रक्त अतिसार और बॉयोस्टैटिसटिक्स पर चर्चा

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इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 12 सितंबर : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के काय चिकित्सा विभाग में चल रहे सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम के पांचवें दिन चिकित्सा विशेषज्ञों ने रक्त अतिसार, यकृत रोग, एनीमिया और बॉयोस्टैटिसटिक्स की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान समेत विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 बरसात में बढ़ते रक्त अतिसार के मामले

पहले सत्र में आयुर्वेदिक कॉलेज पपरोला की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना मिश्रा ने बताया कि मानसून के दौरान रक्त अतिसार (ब्लडी डायरिया) के मामले तेजी से बढ़ते हैं। पेट दर्द और मल में रक्त आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। उन्होंने पंचकर्म की पिच्छा बस्ति, पित्त सामक चिकित्सा और मृदु विरेचन जैसी आयुर्वेदिक विधियों को प्रभावी बताया।
डॉ. मिश्रा ने यह भी कहा कि अनुचित खानपान यकृत विकारों और काला पीलिया को बढ़ावा देता है। उन्होंने पीलिया के विभिन्न प्रकारों और पांडु (एनीमिया) के लक्षणों व उपचार विधियों की जानकारी साझा की।

 चिकित्सा अनुसंधान में बॉयोस्टैटिसटिक्स की भूमिका

दूसरे सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेंद्र सिंह कादियान ने SPSS सॉफ्टवेयर के माध्यम से बॉयोस्टैटिसटिक्स एनालिसिस की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा, “बॉयोस्टैटिसटिक्स केवल आंकड़ों की गणना नहीं, बल्कि चिकित्सा पद्धतियों की वैज्ञानिक पुष्टि का आधार है।”
प्रो. कादियान ने बताया कि बॉयोस्टैटिसटिक्स की मदद से दवाओं की प्रभावशीलता, दुष्प्रभावों की निगरानी, औषध निर्माण का मानकीकरण और शोधों का मेटा-विश्लेषण संभव होता है। कोविड-19 महामारी के दौरान इसकी उपयोगिता स्पष्ट रूप से सामने आई।

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