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यमुना एक्सप्रेसवे पर ट्रॉमा सेंटर की देरी बनी जानलेवा, बढ़ते हादसों ने बढ़ाई चिंता

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ट्रॉमा सेंटर की वर्तमान स्थिति

नोएडा से होकर गुजरने वाले यमुना एक्सप्रेसवे के पास प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर अब तक शुरू नहीं हो सका है। यह स्वास्थ्य सुविधा सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई जानी थी, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं का बढ़ता आंकड़ा

तेज़ रफ्तार के लिए पहचाने जाने वाले यमुना एक्सप्रेसवे पर लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में यहां सैकड़ों गंभीर दुर्घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज न मिलने से मृतकों की संख्या और बढ़ जाती है।

इलाज में देरी से बिगड़ती हालत

हादसों के बाद घायलों को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर न मिलने के कारण दूर के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। इस दौरान कीमती समय नष्ट होता है, जिससे गंभीर रूप से घायल मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है।

निर्माण में देरी के कारण

ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में देरी के पीछे भूमि संबंधी अड़चनें, प्रशासनिक प्रक्रियाएं और तकनीकी कारण बताए जा रहे हैं। इन बाधाओं के चलते परियोजना तय समय पर पूरी नहीं हो सकी, जिसका सीधा असर आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और यात्रियों की नाराजगी

स्थानीय निवासी और रोज़ाना एक्सप्रेसवे से सफर करने वाले लोग इस स्थिति से नाराज हैं। उनका कहना है कि इतने व्यस्त और तेज़ रफ्तार मार्ग पर ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधा का न होना गंभीर लापरवाही है और इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा बेहद अहम होता है। यदि इस दौरान सही इलाज मिल जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं, लेकिन ट्रॉमा सेंटर की अनुपस्थिति इस संभावना को कम कर देती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रशासन का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों के अनुसार अड़चनें दूर होते ही निर्माण कार्य को तेज़ किया जाएगा और इसे जल्द शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

भविष्य को लेकर उम्मीद

लोगों को उम्मीद है कि ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने से एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों में घायल लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिलेगी और मृत्यु दर में कमी आएगी। अब सभी की नजरें इस परियोजना के जल्द पूरा होने पर टिकी हैं।

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