नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026 — एक हालिया शोध में यह पता चला है कि भारत में 18 से 45 वर्ष की उम्र के युवाओं में अचानक होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग है। इस उम्र समूह में लगभग 42.6% आकस्मिक मौतें कार्डियक (दिल से जुड़े) बीमारियों के कारण हुईं, जबकि अन्य मौतें श्वसन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी पाई गईं|
अचानक मौत का व्यापक विश्लेषण
अल्ल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस (AIIMS), नई दिल्ली द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्ययन में मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच कुल 2,214 पोस्टमॉर्टम केसों का विश्लेषण किया गया। उनमें से 180 (8.1%) मौतें अचानक हुईं, और इनमें से 103 मामले (57.2%) युवाओं की थे।
हृदय रोग सबसे ऊपर
शोध में पाया गया कि युवाओं में आकस्मिक मौतों का सबसे आम कारण हार्ट डिजीज रहा, जिसमें कई मामलों में दिल की धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज (70% से अधिक) देखने को मिली। यह ब्लॉकेज गंभीर हार्ट अटैक का सामान्य पैटर्न माना जाता है।
अन्य कारण और रहस्य
लगभग 21.3% मौतों के मामले में मौत का कारण स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका — इन मामलों को ‘नेगेटिव ऑटोप्सी’ कहा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मामलों में दिल की इलेक्ट्रिकल (रिदम) समस्याएँ हो सकती हैं, जो सामान्य पोस्टमॉर्टम में नहीं दिखाई देतीं। इसी तरह श्वसन (सांस सम्बन्धी) बीमारियाँ जैसे निमोनिया और टीबी की वजह से भी युवा मौतें हुईं।
कोविड संक्रमण और वैक्सीन से कोई मजबूत लिंक नहीं
शोध ने यह भी स्पष्ट किया कि कोविड-19 संक्रमण या कोविड वैक्सीन के किसी भी प्रत्यक्ष लिंक का समर्थन नहीं मिला। अध्ययन में ऐसे किसी भी स्पष्ट प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई जो सीधे कोविड या वैक्सीन को शारीरिक मृत्यु का कारण बताता हो।
विशेषज्ञ सलाह
AIIMS और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में समय-समय पर हृदय स्वास्थ्य की जांच, लाइफस्टाइल सुधार (जैसे धूम्रपान एवं अस्वस्थ खान-पान से दूरी) और परिवार स्तर पर स्क्रीनिंग आवश्यक है। इससे न सिर्फ हृदय रोग का पता पहले लगाया जा सकता है, बल्कि आकस्मिक मौतों की संभावना भी कम की जा सकती है।




