हरियाणा विधानसभा के आगामी बजट सत्र से पहले विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह निर्णय विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने लिया है। प्रशिक्षण का उद्देश्य सदन की गरिमा बनाए रखना और विधायकों को विधानसभा की परंपराओं, नियमों व व्यवहार से अवगत कराना है।
दरअसल, हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा वॉकआउट, विधायकों का वेल में आकर बैठना और बिना अनुमति बीच-बीच में बोलने जैसी घटनाएं सामने आई थीं। इन मामलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों के विधायकों ने स्पीकर से आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाएं सदन की मर्यादा के खिलाफ हैं और इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है। सत्र की समाप्ति पर स्पीकर ने स्वयं विधायकों के प्रशिक्षण की घोषणा की।
क्यों जरूरी समझी गई विधायकों की ट्रेनिंग
1. विधायकों की मांग पर लिया गया फैसला
विधानसभा में कार्य संचालन को बेहतर बनाने के लिए कई विधायकों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की जरूरत जताई। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव सहित अन्य सदस्यों ने स्पीकर को सुझाव दिया कि बड़ी संख्या में नए विधायक चुने गए हैं, जिन्हें सदन की कार्यप्रणाली का प्रशिक्षण मिलना चाहिए।
2. सत्र के दौरान अनुशासनहीनता के मामले
विंटर सेशन में कई बार ऐसा देखा गया कि मंत्री जब सवालों के जवाब दे रहे थे, तब वरिष्ठ विधायक भी अपनी सीट से ही टोका-टाकी करने लगे। इससे सदन का माहौल असहज हो गया और स्पीकर को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।
3. बड़ी संख्या में नए विधायक
15वीं विधानसभा में करीब 40 विधायक पहली बार चुने गए हैं, जो कुल सदस्यों का लगभग 45 प्रतिशत हैं। ऐसे में सदन के नियमों और आचरण को लेकर उन्हें प्रशिक्षण देना आवश्यक माना गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों ने इस पर सहमति जताई, जिसके बाद स्पीकर ने फरवरी-मार्च में प्रस्तावित बजट सत्र से पहले विशेष ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने का निर्णय लिया।
कर्मचारियों को पहले ही मिल चुका है प्रशिक्षण
गौरतलब है कि हरियाणा विधानसभा के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पहले ही विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जा चुका है। लोकसभा सचिवालय और हरियाणा विधानसभा सचिवालय के संयुक्त तत्वावधान में 26 और 27 सितंबर को यह ट्रेनिंग कराई गई थी, जिसमें कर्मचारियों को कानून निर्माण और विधायी प्रक्रिया की बारीकियों से अवगत कराया गया था।
अब विधायकों के प्रशिक्षण से उम्मीद की जा रही है कि सदन की कार्यवाही अधिक सुव्यवस्थित, मर्यादित और प्रभावी हो सकेगी।




