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कोहरे में जानलेवा बन रही सड़कें: सरकारी लापरवाही से मिटती सफेद पट्टियाँ, हर सर्दी में बुझ रहे सैकड़ों घरों के चिराग

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सरकारी सिस्टम की आँखों पर बंधी काली पट्टी

सड़कों से गायब होती सफेद पट्टियाँ बनी जानलेवा

सड़कों पर सुरक्षा के लिए बनाई गई सफेद पट्टियाँ और संकेतक आज सरकारी सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो सिस्टम की आँखों पर काली पट्टी बंधी हो, तभी तो सड़क किनारों से सफेद पट्टियाँ धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं।


कोहरे के मौसम में बढ़ता हादसों का खतरा

हर साल हजारों जानें जा रही हैं

जैसे ही सर्दी और कोहरे का मौसम शुरू होता है, सड़क हादसों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। दृश्यता कम होने के कारण सफेद पट्टी, रिफ्लेक्टर और संकेतक जीवनरक्षक साबित होते हैं। लेकिन इनकी अनुपस्थिति हर साल हजारों लोगों की जान ले रही है।


हादसे के बाद ही जागता है प्रशासन

पहले तैयारी क्यों नहीं?

सरकार और प्रशासन को यह अच्छी तरह पता होता है कि कोहरे के मौसम में दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद ठंड शुरू होने से पहले कोई ठोस तैयारी नहीं की जाती। प्रशासन तभी सक्रिय होता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है और कई जानें जा चुकी होती हैं।


ब्रेकर और संकेतकों की अनदेखी

सड़क सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित

हादसे के बाद अधिकारी सड़कों पर निकलते हैं और जांच करते हैं कि ब्रेकर पर सफेद पट्टी है या नहीं, संकेतक लगे हैं या नहीं। सवाल यह है कि यह सब पहले क्यों नहीं किया जाता? ब्रेकर से पहले चेतावनी संकेत क्यों नहीं लगाए जाते ताकि चालक सतर्क हो सके?


ग्रामीण सड़कों की हालत और भी बदतर

हर दिन जानलेवा साबित हो रहे स्पीड ब्रेकर

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है। बिना सफेद पट्टी और बिना संकेतक वाले स्पीड ब्रेकर रोज हादसों को न्योता दे रहे हैं। कई जगह तो ब्रेकर दिखाई ही नहीं देते, जिससे वाहन सीधे उनसे टकरा जाते हैं।


जींद हादसा: लापरवाही की एक और मिसाल

ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की गई जान

जींद में हुए एक हादसे में स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी न होने के कारण एक पुलिसकर्मी को ब्रेकर दिखाई नहीं दिया। उसकी बाइक उछल गई, वह गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। यह कोई अकेली घटना नहीं, ऐसी सैकड़ों घटनाएँ हर सर्दी में सामने आती हैं।


मौत सिर्फ एक खबर बनकर रह जाती है

परिवार पर टूटता है दुखों का पहाड़

अखबारों और मीडिया में यह खबर एक छोटी सी लाइन बनकर छप जाती है कि “सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई।” लेकिन उस परिवार से कोई नहीं पूछता, जो प्रशासन की लापरवाही के कारण अपना सहारा खो बैठा। एक ब्रेकर पर हुई मौत पूरे परिवार के जीवन पर ब्रेक लगा देती है।


समय पर जागना होगा सिस्टम को

जिम्मेदारी तय और सख्त कार्रवाई जरूरी

अब जरूरत है कि सरकार और प्रशासन समय रहते जागे।

  • सड़कों पर सफेद पट्टियाँ और रिफ्लेक्टर अनिवार्य रूप से लगाए जाएँ

  • ब्रेकर से पहले स्पष्ट चेतावनी संकेत लगाए जाएँ

  • लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो

  • नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए

जब तक सिस्टम हादसों के बाद नहीं, बल्कि हादसों से पहले जागना नहीं सीखेगा, तब तक ऐसी दर्दनाक घटनाएँ रुकने वाली नहीं हैं।

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