दिल्ली-NCR की हवा एक बार फिर सांस लेने लायक नहीं रह गई है। रविवार को राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। सुबह के समय कई इलाकों में धुंध की मोटी परत छाई रही और दृश्यता काफी कम दर्ज की गई।
पर्यावरण एजेंसियों के मुताबिक ठंड बढ़ने के साथ ही हवा की रफ्तार थम गई है, जिससे प्रदूषक कण वातावरण में फंस गए हैं। नतीजतन, प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया। सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों पर देखा जा रहा है।
प्रदूषण बढ़ने के कारण आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है। डॉक्टरों ने लोगों को बेवजह घर से बाहर न निकलने और मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण के सख्त कदम लागू कर दिए हैं। निर्माण कार्यों पर निगरानी बढ़ा दी गई है, धूल उड़ने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं और भारी वाहनों की आवाजाही पर भी नियंत्रण किया जा रहा है। स्कूलों को लेकर भी हालात के अनुसार निर्णय लेने के संकेत दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हवा की गति नहीं बढ़ती या बारिश नहीं होती, तब तक राहत की उम्मीद कम है। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों का कम उपयोग करें, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं।
दिल्ली-NCR के लोगों के लिए फिलहाल साफ हवा का इंतजार लंबा होता नजर आ रहा है, जबकि प्रदूषण से जंग के लिए प्रशासन और आम जनता—दोनों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।




