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नई शिक्षा नीति से जनमानस को जोड़ रहा निपुण पंडाल

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गीता महोत्सव में लाखों ने किया भ्रमण, सीखने–सिखाने के नए तरीकों ने लोगों को किया प्रभावित

कुरुक्षेत्र, 3 दिसंबर। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के तहत आयोजित क्राफ्ट मेले में शिक्षा विभाग का निपुण पंडाल विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लाखों आगंतुक यहां पहुंचकर नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और शिक्षा के आधुनिक तरीकों से रूबरू हो रहे हैं। सरस और शिल्प मेले के स्टॉल नंबर 616 पर स्थापित निपुण हरियाणा मिशन का यह स्टॉल इस वर्ष सबसे अधिक चर्चा में रहा।

यह स्टॉल केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को मजबूत करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाने वाला मंच बन गया है। स्टॉल पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक के मार्गदर्शन में एफएलएन समन्वयक महावीर आत्रेय एवं उनकी टीम आगंतुकों को निपुण हरियाणा मिशन की बारीकियों के बारे में जानकारी दे रही है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक कक्षा 3 के सभी बच्चों को बुनियादी दक्षताओं से परिपूर्ण करना है।

स्टॉल पर तैनात शिक्षक—राकेश कुमार, रमेश कुमार, संदीप, नरेश, कोमल, अमित, वीरेंद्र सिंह और अन्य—न केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, बल्कि एक ‘निपुण योद्धा’ के रूप में मिशन का व्यापक प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं। उन्होंने इस जिम्मेदारी को एक उत्सव का रूप दे दिया है।

गतिविधि आधारित प्रदर्शन
स्टॉल पर शिक्षण-अधिगम सामग्री, पहेलियां, खेल तथा रोचक गतिविधियां प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से निपुण लक्ष्यों को सरल, आकर्षक और सहज तरीके से समझाया जा रहा है।

सीधा संवाद और जागरूकता
शिक्षक बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। वे कक्षा 1 से 3 तक अपेक्षित दक्षताओं के महत्व को समझा रहे हैं तथा निपुण भारत मिशन के महत्व पर भी जोर दे रहे हैं। इससे समुदाय में शिक्षा के प्रति नई जागरूकता और ऊर्जा का संचार हो रहा है।

गीता महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर निपुण स्टॉल की स्थापना शिक्षा विभाग की दूरदर्शिता को दर्शाती है। यह हजारों अभिभावकों, बच्चों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों को एक साथ निपुण मिशन की अवधारणा से जोड़ रहा है। साथ ही यह संदेश दे रहा है कि बुनियादी शिक्षा केवल स्कूलों की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कुरुक्षेत्र शिक्षा विभाग का यह प्रयास निपुण हरियाणा मिशन को मात्र एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

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