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जूट से बने बैगों ने बढ़ाई गीता महोत्सव की रौनक, महिलाएं दे रहीं प्लास्टिक मुक्त हरियाणा का संदेश

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स्टॉल नंबर 842 पर ‘जय अंबे स्वयं सहायता समूह’ की महिलाओं ने लगाए आकर्षक उत्पाद

कुरुक्षेत्र, 2 दिसंबर।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के सरस मेले में जहां एक ओर कलाकारों की कला पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाएं प्लास्टिक मुक्त हरियाणा अभियान को नई ऊर्जा दे रही हैं। जूट के बैग और विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पाद लेकर ‘जय अंबे स्वयं सहायता समूह’ की महिलाओं ने सरस मेले में अपने स्टॉल नंबर 842 पर विशेष पहचान बनाई है।

महिला समूह की सदस्य रेखा, जो कुरुक्षेत्र के गांव खेड़ी मारंकड़ा से हैं, ने बताया कि प्लास्टिक का हमारे पर्यावरण और शरीर दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए महोत्सव के दौरान पॉलिथीन का प्रयोग न करने और जूट आधारित उत्पाद अपनाने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके समूह द्वारा तैयार किए गए सभी बैग ऊन के धागे से बनाए गए हैं और इनमें प्लास्टिक का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया है।

रेखा ने बताया कि उनके स्वयं सहायता समूह में कई महिलाएं मिलकर कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है। उनके द्वारा बनाए गए जूट बैग 100 रुपए से 500 रुपए के बीच उपलब्ध हैं। समूह पिछले कई वर्षों से गीता महोत्सव में हिस्सा ले रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा उन्हें जूट उत्पाद निर्माण का निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया गया है और साथ ही बैंकों के माध्यम से कम ब्याज दरों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। समूह द्वारा प्लास्टिक मुक्त हरियाणा के साथ-साथ स्वच्छ भारत-हमारा भारत का संदेश भी पर्यटकों तक पहुंचाया जा रहा है।

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