मध्य प्रदेश के कई जिलों में वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े अंतरराज्यीय शिकार सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। जांच में यह सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से ब्लैकबक (काला हिरण) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार कर उनका मांस और ट्रॉफी कई राज्यों में बेच रहा था।
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की टीम ने एक छापेमारी के दौरान ब्लैकबक का मांस, आधुनिक हथियार और वाहनों का जखीरा बरामद किया। पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि गिरोह में कुछ पेशेवर शिकारी, स्थानीय बिचौलिए और कुछ प्रभावशाली लोग शामिल हैं, जो जंगलों में अवैध शिकार करवाते थे।
जांच अधिकारियों ने बताया कि यह नेटवर्क मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है। इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
जांच में सामने आए मुख्य बिंदु:
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ब्लैकबक और चिंकारा जैसे संरक्षित प्रजातियों का अवैध शिकार किया जा रहा था।
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गिरोह के पास से राइफल, जाल, वाहन और मांस के पैकेट बरामद हुए।
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प्रारंभिक जांच में पता चला कि मांस को बाहरी राज्यों में ऊंचे दाम पर बेचा जाता था।
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पुलिस और वन विभाग अब इस गिरोह के आर्थिक लेनदेन और संपर्कों की जांच कर रहे हैं।
वन विभाग की अपील:
स्थानीय नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे जंगलों या ग्रामीण इलाकों में किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
समाज के लिए संदेश:
वन्यजीवों की रक्षा करना हमारी संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन दोनों के लिए जरूरी है। अवैध शिकार से न केवल वन्यजीवों की प्रजातियाँ खत्म होती हैं, बल्कि यह कानूनन गंभीर अपराध भी है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।




