पेड़ बचाने के लिए ग्रीन अर्थ संगठन की एनजीटी में गुहार, उपायुक्त ने सोमवार को बुलाई मीटिंग
कुरुक्षेत्र।
केडीबी (कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड) द्वारा करीब 30 हजार पेड़ काटे जाने के मामले में जिला प्रशासन अब सक्रिय हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने संबंधित विभागों और पर्यावरण संगठन ग्रीन अर्थ के पदाधिकारियों की सोमवार सुबह 10 बजे बैठक बुलाई है।
पर्यावरण संरक्षण में कार्यरत ग्रीन अर्थ संगठन ने इस मामले को लेकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल), उपायुक्त, जिला वन अधिकारी और केडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखकर पेड़ बचाने की गुहार लगाई है। संगठन के निदेशक डॉ. नरेश भारद्वाज ने बताया कि यदि केडीबी ने पेड़ों की कटाई का निर्णय वापस नहीं लिया, तो एनजीटी में औपचारिक याचिका दायर की जाएगी।
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2015-16 में वन विभाग द्वारा केडीबी की लगभग 60 एकड़ सरकारी भूमि पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे, जो अब विशाल पेड़ों का रूप ले चुके हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ राजनीतिक हितों के कारण इन पेड़ों की कटाई की गई और अब बचे हुए पेड़ों को भी हटाने की तैयारी है।
ग्रीन अर्थ संगठन ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि ये पेड़ शहर के लिए ऑक्सीजन बैंक का काम करते हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में रेलवे रोड, गुलजारी लाल नंदा–पीपली मार्ग, झांसा रोड, रेलवे लाइन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर, विभिन्न पार्कों और ग्रीन बेल्ट्स से हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं, जिससे शहर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
संगठन ने कहा कि शहर की हरियाली लौटाने के लिए अनेक सामाजिक संस्थाएं लगातार पेड़ लगाने और उन्हें बचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद पेड़ों की कटाई पर अंकुश नहीं लग पा रहा।
अंत में डॉ. भारद्वाज ने नागरिकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे अपने आसपास के पेड़ों की रक्षा कर शहर की हरियाली को बनाए रखने में योगदान दें।




