कुरुक्षेत्र: जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गर्भ में भ्रूण लिंग जांच के गोरखधंधे का पर्दाफाश करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में आदेश अस्पताल मोहड़ी के ऑपरेशन थिएटर इंचार्ज, गौड़ अस्पताल की एक महिला दलाल, और दो अन्य व्यक्ति शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, टीम ने कार्रवाई के दौरान अंबाला के छोटा बाजार निवासी कृष्ण गोपाल उर्फ सोनू बजाज को भी एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ पकड़ा। इसके अलावा मकान मालकिन को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। विभाग की यह कार्रवाई बुधवार शाम 4 बजे से गुरुवार सुबह 4 बजे तक चली।
40 हजार रुपये में भ्रूण लिंग जांच की डील
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सabharwal ने बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि एक महिला बाहर से बुलाकर गर्भ में भ्रूण लिंग जांच करवाने का काम कर रही है। सूचना के आधार पर एक डिकोय (गुप्त ग्राहक) को शाहाबाद के अरूप नगर निवासी अमरजीत कौर के संपर्क में भेजा गया।
डिकोय और आरोपी महिला के बीच ₹40,000 में लिंग जांच की डील तय हुई। 8 अक्टूबर को डिकोय ने आधी रकम (₹20,000) अमरजीत कौर के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी। इसके बाद अमरजीत कौर ने उसे 14 अक्टूबर को जांच के लिए शाहाबाद बस अड्डे बुलाया।
15 अक्टूबर को हुआ असली ऑपरेशन
पहले दिन जांच न होने पर आरोपी महिला ने 15 अक्टूबर को दोबारा बुलाया। दोपहर करीब 3 बजे डिकोय अरूप नगर स्थित घर पहुंची, जहां आरोपी अमरजीत कौर ने उसे अंदर बैठाया। करीब एक घंटे बाद दो व्यक्ति कमरे में पहुंचे और थोड़ी देर बाद अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया की गई।
डिकोय ने बताया कि आरोपी ने पेट पर सरसों का तेल लगाकर मशीन से जांच की और इशारों में कहा कि “रिपोर्ट ठीक है”, यानी भ्रूण लड़का बताया गया।
टीम ने मौके पर दी रेड
जैसे ही डिकोय ने बाहर आकर टीम को इशारा किया, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत घर पर छापा मार दिया। टीम ने अमरजीत कौर, कृष्ण गोपाल उर्फ सोनू बजाज, मद्दीपुर निवासी संदीप, और अरूप नगर निवासी रेखा रानी को मौके से पकड़ लिया।
टीम को उनके पास से ₹20,000 नकद और एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन मिली। पूछताछ के बाद चारों को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, भेजा जेल
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग इस मामले की आगे की जांच कर रहा है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके




