इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 1 सितंबर : जन्माष्टमी के पंद्रह दिन बाद मनाई जाने वाली राधाष्टमी पर इस्कॉन श्री राधा-राधाकांत मंदिर, मैन बाजार में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में शुरू हुए कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को राधारानी के दुर्लभ चरण दर्शन का सौभाग्य मिला—जो वर्ष में केवल एक बार ही संभव होता है।

कीर्तन, अभिषेक और मधुर कथा से सजी सुबह
मंगल आरती के बाद भक्तों ने कीर्तन और नृत्य के माध्यम से राधारानी के प्राकट्य उत्सव को मनाया। सुबह 10:30 बजे भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी का अभिषेक हुआ, जिसके पश्चात राधा तत्त्व और लीलाओं पर आधारित कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
“राधा की कृपा के बिना कृष्ण नहीं” — साक्षी गोपाल प्रभुजी
इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपाल प्रभुजी ने कहा, “भगवद्गीता में स्वयं श्रीकृष्ण ने कहा है कि मेरी प्राप्ति मेरे भक्त की कृपा से ही संभव है। राधारानी स्वयं भगवान की परम भक्त हैं—उनकी प्रसन्नता ही भक्ति की कुंजी है।” उन्होंने राधारानी के प्राकट्य की कथा भी सुनाई, जिसमें वृषभानु जी को रावल में खेत जोतते समय एक दिव्य कन्या प्राप्त हुई थी।
कुरुक्षेत्र: ब्रज के बाहर राधारानी का एकमात्र भ्रमण स्थल
उपाध्यक्ष मोहन गौरचंद्र प्रभुजी ने बताया कि ब्रज क्षेत्र के बाहर यदि कहीं राधारानी ने भ्रमण किया, तो वह कुरुक्षेत्र ही है। उन्होंने इस्कॉन संस्थापक श्रील प्रभुपाद जी की राधा भक्ति और लंदन में स्थापित पहले राधा-कृष्ण मंदिर का उल्लेख भी किया।
भंडारा में 500 भक्तों ने ग्रहण किया प्रीति भोज
कार्यक्रम के अंत में भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें लगभग 500 श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और राधारानी की कृपा का अनुभव किया।




