इंसाइट न्यूज 24 , नई दिल्ली: भारत सरकार ने नेपाल द्वारा जताई गई उस आपत्ति को सिरे से नकार दिया है, जिसमें लिपुलेख दर्रे से चल रहे भारत-चीन व्यापार पर सवाल उठाए गए थे। भारत का कहना है कि यह व्यापार दशकों पुरानी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें किसी तरह का नया बदलाव नहीं किया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि लिपुलेख मार्ग से होने वाला व्यापार लंबे समय से जारी है और यह एक “स्थापित व्यवस्था” है। ऐसे में नेपाल की आपत्ति को “अनुचित और निराधार” माना गया है।
भारत का तर्क है कि यह व्यापार न केवल दोनों देशों (भारत और चीन) के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाता है।
वहीं, नेपाल का कहना था कि लिपुलेख क्षेत्र विवादित है और यहां से व्यापार को बढ़ावा देना उनके हितों के खिलाफ है। हालांकि भारत ने दोहराया कि यह गतिविधि किसी भी सीमा विवाद से जुड़ी नहीं है और पूरी तरह से पारंपरिक व्यापारिक समझौते का हिस्सा है।
कूटनीतिक हलकों का मानना है कि इस मामले को तूल देने से दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में तनाव आ सकता है। लेकिन भारत की सख्त प्रतिक्रिया से संकेत साफ है कि सरकार इस मुद्दे पर अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है।




