इंसाइट न्यूज 24: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister of Delhi) पर बुधवार, 20 अगस्त 2025 की सुबह उनके सिविल लाइंस स्थित कैंप कार्यालय में “जन सुनवाई” कार्यक्रम के दौरान हमला हुआ। एक शख्स शिकायतकर्ता बनकर आया, उन्होंने सीएम को कागज़ दिए और अचानक उन पर धक्का देते हुए हाथ पकड़ने और बाल खींचने की कोशिश की। कुछ लोगों ने थप्पड़ मारने की बात कही, लेकिन पुलिस ने बाद में इसे धक्का-मुक्की और हाथ पकड़ने तक सीमित बताया।
आरोपी की पहचान
हमलावर की पहचान राजेश (Rajesh Sakariya या Rajesh Bhai Khimji Sakariya) के रूप में की गई है, जो गुजरात के राजकोट निवासी हैं और करीब 41 वर्षीय बताए गए हैं। सीएम के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने उसे काबू कर पुलिस के हवाले किया।
मुकदमा दर्ज और जाँच
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) (हत्या की कोशिश), 132 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), और 221 (सरकारी कार्य में बाधा) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में IB और स्पेशल सेल की टीमें भी शामिल हैं। अधिकारी आरोपी से पूंछताछ कर रहे हैं और उसे 5–7 दिनों की रिमांड पर लिया जा सकता है।
हमलावर के पीछे संभावित वजहें
— आरोपी की मां ने कहा कि उनके बेटे को जानवरों (कुत्तों) से गहरा लगाव था और सुप्रीम कोर्ट के NCR में आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर भेजने के निर्णय से वह नाराज था। इसका असर उसके विचारों पर पड़ा और इसी नाराजगी के सिलसिले में उन्होंने यह कदम उठाया।
— कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि वह एक रिश्तेदार की गिरफ्तारी को लेकर मदद मांगने आया था और तभी घटना हुई।
सीएम का पहला बयान
सीएम रेखा गुप्ता ने हमले के बाद कहा:
“यह केवल मेरे ऊपर हमला नहीं, बल्कि दिल्ली की सेवा और जनता की भलाई पर किया गया एक कायरतापूर्ण प्रयास है। मैं सदमे में थी, लेकिन अब बेहतर महसूस कर रही हूँ। यह हमला मेरे संकल्प को कभी नहीं तोड़ सकता; मैं और अधिक ऊर्जा व समर्पण के साथ आपके बीच फिर आऊँगी।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद
— बीजेपी नेताओं ने हमले की कड़ी निंदा की है और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया।
— वहीं AAP नेता आतिशी ने भी हमले की निंदा करते हुए लोकतंत्र में शांति पर बल दिया।
— इस बीच AAP विधायक गोपाल इटालिया ने आरोप लगाया कि हमलावर की AAP नेता के साथ एक फोटो वायरल हुई, जिसे उन्होंने एआई जनरेटेड करार दिया।
सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने जन सुनवाई जैसे खुल्ले फोरम में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कई नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और सुधार की मांग की है।




