इंसाइट न्यूज 24, चंडीगढ़, 20 अगस्त — हरियाणा की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस महासचिव और सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना राज्य में वित्तीय कुशासन और सरकारी उपेक्षा की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य गरीबों को नि:शुल्क और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना था, लेकिन बजट की कमी और भुगतान में देरी के कारण निजी अस्पताल अब आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज करने से पीछे हट रहे हैं।
बजट पर सवाल:
सैलजा ने कहा कि सरकार ने योजना के लिए मात्र ₹700 करोड़ का बजट रखा है, जबकि निजी अस्पताल संचालकों ने ₹2000 करोड़ की मांग की थी। “मरीजों की संख्या 45% बढ़ी है, तो बजट भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए,” उन्होंने कहा।
अस्पतालों की स्थिति:
1300 सूचीबद्ध अस्पतालों में से 675 निजी हैं, लेकिन सरकार समय पर उनके बिलों का भुगतान नहीं कर रही है। कई बार बकाया भुगतान की मांग के बावजूद अस्पतालों ने दवाइयों, सर्जरी और भर्ती जैसी सेवाओं पर रोक लगा दी है। मरीजों को काउंटर पर “क्लेम रुका है” या “लिमिट पूरी” जैसे जवाब मिल रहे हैं।
सरकारी संस्थानों में भी संकट:
सैलजा ने कहा कि पीजीआई जैसे बड़े संस्थानों में भी स्टाफ की कमी, उपकरणों की खराबी और दवा आपूर्ति में बाधाएं बनी हुई हैं। रेफरल और क्लेम प्रोसेसिंग की जटिलताओं के कारण कई वार्ड खाली पड़े हैं।
सैलजा की मांगें:
• 30 दिनों में सभी लंबित भुगतान निपटाए जाएं
• एंपैनलमेंट की शर्तें सरल और पारदर्शी हों
• क्लेम निपटान की समयसीमा कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाई जाए
• हर जिले में 24×7 आयुष्मान हेल्प डेस्क सक्रिय हो
• बहुभाषी हेल्पलाइन और रियल टाइम क्लेम ट्रैकिंग डैशबोर्ड लागू किया जाए
सांसद ने कहा कि सरकार को स्वास्थ्य के मोर्चे पर “कागजी उपलब्धियों” से आगे बढ़कर ज़मीनी सुधार करने होंगे, वरना यह योजना गरीबों के लिए राहत नहीं, परेशानी बनती जाएगी।




