इंसाइट न्यूज 24: हरियाणा का कृषि क्षेत्र पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। इस बार बरसात ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल जैसे धान उत्पादक जिलों में या तो बारिश बहुत कम हुई है या कहीं ज़्यादा पानी गिरने से खेत जलमग्न हो गए हैं।
धान के पौधों में पीलापन और कीट हमले बढ़ रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार को तुरंत राहत पैकेज और सिंचाई के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने चाहिए।
एक किसान ने कहा—“हमने बीज और खाद पर भारी खर्च किया, अब अगर फसल डूब गई तो पूरे साल का सहारा छिन जाएगा।”
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगले 15 दिनों में मौसम की चाल तय करेगी कि इस बार उत्पादन सामान्य रहेगा या घाटा होगा।




