इंसाइट न्यूज 24: केरल में रहने वाले 105 वर्षीय एम. ए. अब्दुल्ला मौलवी ने यह साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। जीवन का शताब्दी पड़ाव पार कर चुके मौलवी साहब ने हाल ही में डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण पूरा कर लिया और अब वे मोबाइल फोन, स्मार्ट ऐप्स और ऑनलाइन सुविधाओं का सहज उपयोग कर पा रहे हैं।
परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पहले केवल पारंपरिक तरीक़ों से ही संवाद करते थे, लेकिन अब उन्होंने वीडियो कॉल करना, व्हाट्सऐप पर संदेश भेजना और इंटरनेट पर जानकारी खोजना सीख लिया है। यह उपलब्धि उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरी समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
इस पहल से यह संदेश स्पष्ट होता है कि तकनीक केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बुज़ुर्ग भी यदि चाहें तो डिजिटल दुनिया का हिस्सा बन सकते हैं। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी मौलवी साहब की इस उपलब्धि को सराहते हुए कहा कि उनका उदाहरण आने वाली पीढ़ियों को सीखने और जिज्ञासा बनाए रखने की प्रेरणा देगा।




