इंसाइट न्यूज 24, कुरुक्षेत्र, 8 सितंबर : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के होम्योपैथी क्लीनिक में दो मरीजों को मिली राहत ने वैकल्पिक चिकित्सा की विश्वसनीयता को नई ऊंचाई दी है। सफेद रंग की छोटी गोलियों ने वह कर दिखाया, जो कई बार सर्जरी से भी संभव नहीं होता—10 एमएम तक की पथरी बिना ऑपरेशन पेशाब के रास्ते बाहर निकल आई।
मितुल अरोड़ा का मामला: 4 महीने में चमत्कार
कुरुक्षेत्र निवासी मितुल अरोड़ा (45) पिछले पांच वर्षों से गुर्दे की पथरी से जूझ रहे थे। जब दर्द असहनीय हो गया, तो उन्होंने श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के होम्योपैथी क्लीनिक में डॉ. रिया शर्मा से परामर्श लिया। चार महीने तक नियमित दवा सेवन के बाद उनकी 10 एमएम की पथरी बिना सर्जरी बाहर निकल आई।
डॉ. रिया ने बताया, “आमतौर पर इतनी बड़ी पथरी ऑपरेशन से ही निकलती है, लेकिन अरोड़ा की पथरी कैल्शियम की नहीं थी, जिससे दवाओं ने बेहतर असर किया।”
प्रवीण कुमार का मामला: सिर्फ 15 दिन में राहत
कैथल जिले के बाकल गांव निवासी प्रवीण कुमार को दोनों गुर्दों में 7–8 एमएम की पथरी थी। डॉ. कुलजीत कौर ने उन्हें बर्बेरिस वल्गैरिस और हाइड्रेजिया जैसी औषधियां दीं। सिर्फ 15 दिन में उनकी पथरी पेशाब के रास्ते बाहर आ गई।
डॉ. कुलजीत ने बताया, “कैल्शियम स्टोन सबसे आम हैं, लेकिन गलत खान-पान, कम पानी और डायबिटीज जैसे कारणों से अन्य प्रकार की पथरी भी बनती है। होम्योपैथी प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है, जो पथरी को टुकड़ों में तोड़कर बाहर निकालता है।”
आयुष पद्धति की बढ़ती विश्वसनीयता
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा, “जब पूरी दुनिया वैकल्पिक चिकित्सा की ओर उम्मीद से देख रही है, ऐसे सफल उपचार आयुष की ताकत को साबित करते हैं।”




