पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम जेल के लैंडलाइन फोन से एक व्यक्ति को धमकी देने की शिकायत को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। मामला उस समय सामने आया जब अदालत एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने जेल के लैंडलाइन से आए आठ धमकी भरे कॉल के स्क्रीनशॉट अदालत के समक्ष पेश किए।
जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह की पीठ ने हरियाणा के डीजी जेल को आदेश दिया है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारी से करवाई जाए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो यह अत्यंत गंभीर मामला होगा और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जमानत याचिका खारिज, आरोपी पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और शस्त्र अधिनियम समेत कई धाराओं में मामला दर्ज है। अदालत ने कहा कि आरोपी के आचरण से प्रतीत होता है कि उसने गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की है।
पीठ के अनुसार, आरोपी द्वारा पेश किया गया हलफनामा—जिसमें कहा गया था कि शिकायतकर्ता ने गलतफहमी में एफआईआर करवाई थी—दबाव में दिलवाया गया। अदालत में उपस्थित शिकायतकर्ता ने भी साफ कहा कि हलफनामा धमकियों और दबाव का नतीजा था।
अदालत ने तीन प्रमुख बिंदुओं के आधार पर जमानत ठुकराई
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1 सितंबर को दायर हलफनामे को अदालत ने गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास बताया, जो आरोपी के आचरण पर गंभीर सवाल उठाता है।
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निजी गवाहों के बयान अभी दर्ज नहीं हुए हैं, ऐसे में आरोपी की रिहाई न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
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अदालत ने माना कि इस मामले में जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता, इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद, जेल प्रशासन और कॉल के स्रोत की जांच तेज होने की उम्मीद है।




