चंडीगढ़।
हरियाणा के श्रम विभाग में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। करोड़ों रुपये के वर्क स्लिप घोटाले के बाद अब विभाग की ऑनलाइन ट्रांसफर व्यवस्था में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मनचाही पोस्टिंग दिलाने के लिए तयशुदा राशि वसूली गई। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचने के बाद अदालत ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को जांच के आदेश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार यह मामला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के संज्ञान में भी लाया गया है। मुख्यमंत्री ने जांच की नियमित निगरानी करने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
ऑनलाइन ट्रांसफर में कथित हेरफेर का आरोप
यह मामला वर्ष 2023-24 में श्रम विभाग में हुए ऑनलाइन ट्रांसफर से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि पसंदीदा स्थान पर तैनाती के बदले कर्मचारियों से एक लाख रुपये तक की मांग की गई। विभाग के एक कर्मचारी ने इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
याचिका में कहा गया है कि ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम के तहत उसका तबादला चंडीगढ़ कर दिया गया, जबकि उसने इसके लिए कोई विकल्प नहीं चुना था। जब उसने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली, तो कथित तौर पर बताया गया कि मनचाही पोस्टिंग के लिए एक लाख रुपये देने होते हैं। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए।
जांच शुरू, कई कर्मचारी रडार पर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक ACB ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है और ट्रांसफर प्रक्रिया से जुड़े करीब दो दर्जन कर्मचारियों को संदेह के दायरे में रखा गया है। बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी ट्रांसफर नीति के क्रियान्वयन से जुड़े थे। जांच के चलते श्रम विभाग में हलचल का माहौल बना हुआ है और संबंधित अधिकारी दस्तावेजों को खंगालने में जुटे हैं।
वर्क स्लिप घोटाले की जांच भी साथ-साथ
श्रम विभाग पहले से ही करीब 1500 करोड़ रुपये के संभावित वर्क स्लिप घोटाले की जांच का सामना कर रहा है। इस मामले में राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समिति को एक माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित इस समिति में आईएएस राजीव रतन और आईपीएस पंकज नैन सदस्य हैं। समिति न केवल अनियमितताओं की जांच करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुधारात्मक उपाय भी सुझाएगी।
क्या है वर्क स्लिप घोटाला
श्रम मंत्री अनिल विज के निर्देश पर भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड का सामान्य ऑडिट कराया गया था। ऑडिट में अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच 13 जिलों में जारी लगभग छह लाख वर्क स्लिप्स में से 5.46 लाख से अधिक फर्जी पाई गईं, जो कुल का 91 प्रतिशत से ज्यादा हैं। वहीं 2.21 लाख श्रमिक पंजीकरण मामलों की फिजिकल जांच में केवल 14,240 पंजीकरण ही सही पाए गए। इस मामले की जांच फिलहाल जारी है।




