हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायकों को कम बोलने का मौका मिलने के आरोपों पर विधानसभा स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने शुक्रवार को जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विंटर सेशन के दौरान सदन में कांग्रेस विधायकों को सत्ता पक्ष बीजेपी की तुलना में अधिक समय दिया गया।
स्पीकर ने बताया कि शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों को बोलने के लिए चार मिनट का समय दिया गया, जबकि बीजेपी विधायकों को कांग्रेस के मुकाबले केवल एक मिनट ही मिला। वहीं इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के दो विधायकों को सदन में तीन मिनट का समय दिया गया। यह जानकारी उन्होंने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
तीन दिनों में चार बैठकें, लगभग 25 घंटे चली कार्यवाही
स्पीकर ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र तीन दिनों तक चला, जिसमें कुल चार बैठकें हुईं। सत्र की अवधि 24 घंटे 45 मिनट रही। इस दौरान 10 प्रश्नकाल और 8 शून्यकाल रखे गए। 40 विधायकों के 80 प्रश्न सदन में स्वीकृत हुए, जिनमें कांग्रेस के 22, बीजेपी के 14, INLD के 2 और 2 निर्दलीय विधायकों के प्रश्न शामिल थे। शून्यकाल के दौरान 3 घंटे 18 मिनट में 70 सदस्यों ने अपनी बात रखी।
अविश्वास प्रस्ताव पर 4 घंटे 40 मिनट बहस
स्पीकर ने बताया कि सत्र में कुल 16 विधेयक पारित किए गए। कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 4 घंटे 40 मिनट तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें 17 विधायकों ने हिस्सा लिया। इनमें कांग्रेस के 8, बीजेपी के 6 और INLD के 2 विधायक शामिल रहे। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिला।
अनुशासन को लेकर सख्ती, 9 विधायक किए गए ‘नेम’
स्पीकर ने बताया कि सत्र के दौरान गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस और वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी चर्चा कराई गई। विधानसभा की कार्यवाही को 1058 लोगों ने देखा। अनुशासन बनाए रखने के लिए चेतावनी के बावजूद 9 विधायकों को ‘नेम’ किया गया, जिन्हें बाद में मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के आग्रह पर वापस बुला लिया गया।
कांग्रेस के आरोपों को बताया बेबुनियाद
कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पीकर ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव सहित अन्य मुद्दों पर सभी दलों को बराबर अवसर दिया गया। कटऑफ तिथि के बाद जिन विधायकों के प्रश्न सूचीबद्ध नहीं हो पाए थे, उन्हें भी सदन में बोलने का मौका दिया गया।
गीता भुक्कल के व्यवहार पर टिप्पणी
कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल द्वारा मार्शल के साथ किए गए व्यवहार पर स्पीकर ने कहा कि सदन की मर्यादा सर्वोपरि है और सभी सदस्यों को उसका पालन करना चाहिए। वहीं इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि यदि किसी विषय से जनता में भ्रम की स्थिति बनती है, तो उस पर सदन में चर्चा कराना पूरी तरह उचित है।




