चंडीगढ़, 26 नवंबर — हरियाणा पुलिस की सड़क सुरक्षा पर ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति का बड़ा असर दिखाई दे रहा है। 1 जनवरी 2025 से 24 नवंबर 2025 तक पूरे राज्य में 63,073 ड्रंकन ड्राइविंग चालान किए गए। पुलिस का कहना है कि नशे में वाहन चलाने वालों पर सख़्त कार्रवाई ने सड़क हादसों को रोकने और ट्रैफिक अनुशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जिलेवार स्थिति: गुरुग्राम सबसे आगे
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार:
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गुरुग्राम: 24,972 चालान
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फरीदाबाद: 7,402
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करनाल: 4,851
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पंचकूला: 4,180
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जींद: 3,109
बड़े शहरी क्षेत्रों में निगरानी सबसे अधिक बढ़ाई गई है, विशेषकर रात के समय, जब ट्रैफिक जोखिम ज्यादा रहता है।
सड़क सुरक्षा के विशेष अभियान जारी
हरियाणा पुलिस के निर्देश पर सभी जिलों में नियमित अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों में केवल ड्रंकन ड्राइविंग ही नहीं, बल्कि:
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लेन ड्राइविंग
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ध्वनि प्रदूषण
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रेड और ब्लू लाइट के दुरुपयोग
पर भी सख़्ती से कार्रवाई की जा रही है। पुलिस मुख्यालय ने जिलों को इन अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।
टोल प्लाज़ाओं पर अल्को-सेन्सर और ई-चालान मशीनें
सभी टोल प्लाज़ाओं पर शाम 6 से रात 10 बजे तक विशेष पुलिस टीमें तैनात की जा रही हैं। ये टीमें Alco-Sensor और E-Challan मशीनों से लैस हैं, ताकि मौके पर ही नशे में ड्राइविंग की जांच और चालान की प्रक्रिया पूरी की जा सके। इससे हाईवे सुरक्षा को बड़ा बल मिला है।
लक्ष्य केवल दंड नहीं, जनजागरूकता भी
पुलिस का मानना है कि ड्रंकन ड्राइविंग व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक सुरक्षा का मुद्दा है। इसलिए चालान केवल दंड नहीं, बल्कि जागरूकता का साधन है।
पुलिस की अपील—
“नशा करके गाड़ी न चलाएं—आपकी ज़िम्मेदारी आपके हाथों में है।”
नागरिकों से अपील
हरियाणा पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि वे स्वयं नियमों का पालन करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
सुरक्षित ड्राइविंग ही असली सुरक्षा कवच है।




