इंसाइट न्यूज 24, दिल्ली: नई दिल्ली में शुक्रवार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी पुरानी अधिसूचना में महत्वपूर्ण सुधार किया है। इस नए दिशा-निर्देश के तहत, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यदि कोई सड़क कुत्ता पकड़ा जाता है, तो उसे नियत प्रक्रिया—स्टेरिलाइज़ेशन (बांझीकरण), टीकाकरण और कीड़े-मुक्त करने (डिवार्मिंग) के बाद उसी इलाके में लौटाया जाएगा, जहाँ से उसे उठाया गया था। केवल ऐसे कुत्ते जिन्हें रिकेट्स (rabies) हो या जो आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित करें, उन्हें छोड़ने का आदेश नहीं है।
साथ ही, अदालत ने फीडिंग ज़ोन यानी विशेष स्थान बनाने की मुस्तैदी ली है, जहाँ जनता गाँव-टोलों और गली-मोहल्लों में कुत्तों को खाना दे सकती है — सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम फीडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
अदालत ने क्यों बदला अपना रुख
1.जनाक्रोश का असर
आरंभिक आदेश, जिसमें प्रत्येक सड़क कुत्ते को आश्रयस्थलों में भेजने का निर्देश था, उस पर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, आम नागरिकों और कई सार्वजनिक हस्तियों ने तीखी आपत्ति जताई थी। अस्थायी व्यवस्था और संरचनात्मक त्रुटियों का हवाला देते हुए, यह रणनीति न केवल अमल में चुनौतीपूर्ण रही बल्कि मानवता की दृष्टि से भी अनुचित मानी गई।
2.वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना
सुप्रीम कोर्ट ने इस बदलाव को एक “वैज्ञानिक विधि” और मानवीय निर्णय बताया है — जिसमें कुत्तों को सरकारी नीतियों की कठोरता के बजाय संवेदनशीलता के साथ संभालने की बात जोर से उभर कर सामने आई। सुप्रीम कोर्ट के इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए बीजेपी नेता एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनेका गांधी ने इसे एक “Scientific judgement” की संज्ञा दी है। उन्होंने साथ ही “आक्रामक कुत्ते” की स्पष्ट परिभाषा की ज़रूरत भी जताई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और सामाजिक असर
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PETA इंडिया ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा — “Every dog has her day” — यानी कि हर कुत्ते को सम्मान व अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे पालतू खरीदने के बजाय आवारा कुत्तों को गोद लें, उन्हें पानी दें और उनकी देखभाल में सहयोग दें।
- रोड पर खुलेआम भोजन देने पर रोक और फीडिंग ज़ोन का निर्माण, साफ़ दिखाते हैं कि न्यायालय कुत्तों की भलाई और शहर की साफ़-सफाई दोनों को संतुलित रूप से देखना चाहता है।
निष्कर्ष: संवेदनशीलता और विज्ञान का मेल
नए संशोधित आदेश ने एक ऐसी राह दिखलाई है जहाँ मानवीय संवेदना और वैज्ञानिक उपाय एक साथ काम कर सकते हैं — सड़क पर कुत्तों को उठाकर आश्रय में भेजने के बजाय, उन्हें स्वास्थ्यकर बनाकर वहीं छोड़ देना और उन्हें सुरक्षित जगह पर खिलाना, दोहरी सुरक्षा करने जैसा है।




