कुरुक्षेत्र, 15 जनवरी।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में हिन्दी विभाग द्वारा विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर ‘‘राष्ट्रीय–अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर हिन्दी‘‘ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वानों ने हिन्दी के वैश्विक विस्तार, उसकी उपयोगिता और प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के प्रो. विनय कुमार ने कहा कि हिन्दी अब वैश्विक स्तर पर अपनी विशेष पहचान बना रही है। अंग्रेजी और चीनी के बाद विश्व पटल पर हिन्दी की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने हिन्दी के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
रांची विश्वविद्यालय, झारखंड से आए विशिष्ट वक्ता प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक अस्मिता है। हिन्दी के माध्यम से ही भारत की पहचान विश्व स्तर पर सशक्त हो रही है और विश्व हिन्दी सम्मेलनों ने इसे नई दिशा दी है।
अतिविशिष्ट वक्ता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रो. अवधेश कुमार ने हिन्दी की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि हिन्दी को ऊंचाइयों तक ले जाना है, तो उसे ज्ञान-विज्ञान, व्यवहार और आर्थिक क्षेत्रों में भी सशक्त बनाना होगा। उन्होंने कबीर, तुलसीदास, सूर और निराला जैसे कवियों की रचनाओं की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर भी विचार व्यक्त किए।
हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी संयोजिका प्रो. पुष्पा रानी ने कहा कि हिन्दी का प्रयोग केवल औपचारिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी किया जाना चाहिए। भाषा के प्रति वास्तविक दायित्व निभाना ही उसका सच्चा सम्मान है।
पीएनबी की पूर्व प्रबंधक अर्चना कोचर ने हिन्दी की वर्तमान स्थिति, हिन्दी से जुड़े सॉफ्टवेयर और बैंकिंग क्षेत्र में हिन्दी के उपयोग पर जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में उनकी साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन किया गया। संगोष्ठी में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों व शोधार्थियों ने शोध-पत्रों का वाचन किया।
इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में संगोष्ठी संयोजिका प्रो. पुष्पा रानी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।




