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‘वंदे मातरम्’ भारतीय संस्कृति, एकता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक: प्रो. धीमान

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श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में मनाई गई ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ

कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ बड़े हर्षोल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और सामूहिक रूप से “वंदे मातरम्” का गान कर राष्ट्र के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि “‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह हमारे राष्ट्र की आत्मा की अभिव्यक्ति है। इसकी प्रत्येक पंक्ति में मातृभूमि के प्रति असीम प्रेम और समर्पण झलकता है।” उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हम उस भारत के नागरिक हैं, जहां यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बना।

कुलपति ने कहा कि “‘वंदे मातरम्’ भारतीय संस्कृति, एकता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। इसकी गूंज हमें यह याद दिलाती है कि मातृभूमि की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।” उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस गीत की भावना को अपने जीवन में आत्मसात करें और भारत की सांस्कृतिक एवं नैतिक धरोहर को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. जितेश कुमार पंडा, प्रॉक्टर प्रो. सतीश वत्स, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, प्रो. राजेंद्र सिंह चौधरी, प्रो. दीप्ति पराशर, प्रो. शीलत सिंगला, प्रो. सीमा रानी, प्रो. कृष्ण कुमार, प्रो. रविंद्र अरोड़ा, प्रो. रवि राज, प्रो. शुभा कौशल, प्रो. पीसी मंगल, प्रो. सचिन शर्मा, डॉ. सुखबीर, डॉ. अनामिका, डॉ. नेहा लांबा, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. प्रेरणा शर्मा, डॉ. प्रीति गहलावत सहित विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

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