इंसाइट न्यूज 24, 31 अगस्त : गीता ज्ञान संस्थानम में राधाष्टमी और श्री कृपा बिहारी जी के वार्षिक पाटोत्सव का आयोजन गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज जी के सान्निध्य में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और राधा जी के दिव्य प्रेम का अनुभव किया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने राधा जी को पालने में झुलाया, लाड़ली जी का अभिषेक किया और गीता पाठ में भाग लिया। राधा-कृष्ण भाव के भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं ने राधा भाव पर भावविभोर होकर नृत्य किया। श्री कृपा बिहारी जी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
स्वामी ज्ञानानंद जी ने अपने आशीर्वचन में कहा, “राधा करुणा और निष्काम प्रेम का अवतार हैं। भाद्रपद का महीना अत्यंत पवित्र है — कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण का अवतार हुआ और शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा जी का। राधा जी का अवतरण कान्हा से 350 दिन पूर्व हुआ, जिससे यह धरा पहले करुणा और प्रेम से आलोकित हुई।”
उन्होंने यह भी बताया कि राधाष्टमी के दिन ही श्री कृपा बिहारी जी की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, इसलिए इस दिन उनका पाटोत्सव विशेष श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है।




