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राजस्थानी देसी खान-पान और लोक संस्कृति ने गीता महोत्सव में बढ़ाया रौनक

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कुरुक्षेत्र, 4 दिसंबर। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर के तट पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में राजस्थान की संस्कृति और व्यंजनों का खास आकर्षण देखने को मिल रहा है। राजा-महाराजाओं की भूमि राजस्थान के स्वादिष्ट पकवान और लोक संस्कृति पर्यटकों की जीभ का स्वाद बढ़ा रहे हैं।

महोत्सव में दूर-दूर से आए पर्यटक स्टॉल नंबर 819-20 पर राजस्थानी दाल-बाटी, चूरमा, राज कचौरी, केसरिया दूध और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चख रहे हैं। ये व्यंजन न सिर्फ आगंतुकों की भूख मिटा रहे हैं, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक पाक-संस्कृति का अनुभव भी करा रहे हैं। पर्यटक इन व्यंजनों को पैक करवाकर अपने घर ले जाने की सुविधा भी ले रहे हैं।

राजस्थानी लोक नृत्य कच्ची घोड़ी भी महोत्सव का विशेष आकर्षण बना हुआ है। कलाकारों की पारंपरिक पोशाक, घोड़ी की सजे-धजे प्रतिकृति और तेज़ लय पर किए जाने वाले नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया है। पर्यटक कलाकारों के साथ झूमते हुए न केवल मनोरंजन का आनंद ले रहे हैं, बल्कि उनकी कला और संस्कृति को करीब से जानने के लिए भी उत्सुक दिखाई दे रहे हैं।

महोत्सव के सरस मेले में लगे इस राजस्थानी स्टॉल और लोक कला ने गीता महोत्सव के सांस्कृतिक वातावरण में एक अलग ही रंग भर दिया है। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और खान-पान का यह संगम पर्यटकों को एक यादगार अनुभव प्रदान कर रहा है।

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